हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हुज्जतुल इस्लाम हसन महमूदी ने ज़ोहर और असर की नमाज़ से पहले हरम मुक़द्दस बानू-ए-किरामत में "शरहे आयात" प्रोग्राम में सूरह आले-इमरान की आयत 125 का हवाला देते हुए कहा,इस आयत का तर्जुमा (अर्थ) यह है "हाँ, अगर तुम सब्र करो और तक़्वा इख़्तियार करो, और उसी तेज़ी और ग़ुस्से के साथ तुम पर टूट पड़ें, तो तुम्हारा रब तुम्हें पाँच हज़ार निशानदार फ़रिश्तों से यारी करेगा।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस आयत में जारी वर्तमान क्रिया ग़ैबी मदद के हमेशा जारी रहने की निशानी है। अल्लाह हमेशा मोमिनों की ग़ैबी मददों से यारी कर सकता है। यह हमारे शहीद रहबर का नज़रिया था।
फ़रिश्तों के नुज़ूल के लिए दो शराएत ज़रूरी हैं: "सब्र और तक़्वा"। सब्र का मतलब अल्लाह की राह में डटे रहना है, जैसा कि आज ईरान के लोगों ने पचास रातें सड़कों पर मौजूद रहकर दिखा दिया। तक़्वा का मतलब गुनाहों से बचना और वाजिबात (फ़र्ज़) को अंजाम देना है, जिसमें मैदान में मौजूदी और मुजाहिदों की पुष्टि भी शामिल है।
हरम मुक़द्दस के ख़तीब ने तबस के हादसे की सालगिरह और अमेरिकी हवाई जहाज़ों की तबाही में अल्लाह की ग़ैबी मदद को याद करते हुए कहा,इमाम खुमैनी ने फ़रमाया था तबस की रेत अल्लाह के सिपाही थे।जैसा कि क़ुरान में है असमानों और ज़मीन के सिपाही अल्लाह के हैं (लिल्लाहि जुनूदुस समावाति वल अर्द); आज समंदरों का पानी भी, जहाँ अमेरिकी जहाज़ मौजूद हैंअल्लाह का सिपाही है।
हुज्जतुल-इस्लाम महमूदी ने फ़िरऔन के नारे "अना रब्बुकुमुल आला" (मैं तुम्हारा सबसे ऊँचा पालनहार हूँ) का हवाला देते हुए कहा,आज वही मंज़र मुक़ाबले के मोर्चे पर दोहराया जा रहा है। अल्लाह ने मोमिनों से वादा किया है कि अगर तुम सब्र और तक़्वा इख़्तियार करोगे तो वह पाँच हज़ार फ़रिश्ते तुम्हारी मदद को भेज देगा, तब तुम अपनी आँखों से देख लोगे कि ज़माने का फ़िरऔन और इसराईल कैसे तबाह हो जाते हैं।
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