हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नन लिखित रिवायत मीज़ान उल हिकमा किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
امام صادق علیهالسلام:
«إنَّکُم إلی إنفاقِ ما اکتَسَبتُم أحوَجُ مِنکُم إلَی اکتِسابِ ما تَجمَعونَ»
इमाम सादिक़ (अलैहिस्सलाम) ने फरमाया:
"तुम उस चीज़ को ख़र्च करने के ज़्यादा मुहताज हो जो कमा चुके हो, बनिस्बत उसे कमाने के जो (अभी) जमा कर रहे हो।"
मीज़ान उल हिकमा, भाग 12, पेज 371
सरल अर्थ: इंसान को नई दौलत जमा करने से ज़्यादा इस बात की ज़रूरत है कि वह जो पहले कमा चुका है, उसे अल्लाह की राह में ख़र्च करे। यानी दान और ख़ैरात करना नए धन के इकट्ठा करने से कहीं ज़्यादा अहम और ज़रूरी है।
आपकी टिप्पणी