हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार निम्नलिखित रिवायत 'बिहार उल अवार' किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
امام صادق علیهالسّلام:
«ما قَضی مُسْلِمٌ لِمُسْلِمٍ حاجَةً إِلاّ ناداهُ اللّه ُ تَبارَکَ وَ تَعالی: عَلَیَّ ثَوابُکَ وَلا اَرْضی لَکَ بِدُونِ الْجَنَّةِ».
इमाम सादिक़ (अ) ने फ़रमाया:
"जो मुसलमान किसी दूसरे मुसलमान की ज़रूरत पूरी करता है, तो अल्लाह तबारक व तआला उसे निदा देकर फरमाता है:
तेरा अज्र और सवाब मेरे ज़िम्मे है, और मैं तेरे लिए जन्नत के अलावा किसी (और चीज़) से राज़ी नहीं हूँ।"
बिहार उल अनवार, भाग 74, पेज 312
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