हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, 28 अप्रैल, बृहस्पतिवार को, भारत में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही अपने प्रतिनिधिमंडल, हुज्जतुल-इस्लाम मौलाना सैयद तक़ी हैदर तक़वी और डॉ. हैदर रज़ा ज़ाबित के साथ दिल्ली से विशाखापट्टनम पधारे।

विशाखापट्टनम में इमाम रज़ा (अ) संस्थान के तत्वावधान में मस्जिद-ए-मौलूद-ए-काबा में आयोजित शोक सभा को संबोधित करते हुए डॉ. हकीमुल्लाही ने रहबर-ए-मोअज़्ज़म (सर्वोच्च नेता) और ईरान के अन्य शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि भारत पूरी दुनिया में महात्मा गांधी के नाम से पहचाना जाता है, क्योंकि गांधी उच्च मूल्यों, उत्तम चरित्र और मानवीय सिद्धांतों के प्रवर्तक एक महान नेता थे। ईरानी जनता भी महात्मा गांधी को अत्यधिक सम्मान की दृष्टि से देखती है, यहाँ तक कि ईरान में उनके नाम पर सड़कें और अस्पताल मौजूद हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार ईरान महात्मा गांधी को सम्मान देता है, उसी प्रकार आज भारत भी शहीद-ए-उम्मत, इस्लामी क्रांति के रहबर आयतुल्लाह ख़ामेनेई (क) को सम्मान और प्रतिष्ठा की दृष्टि से देख रहा है। उनके अनुसार, महात्मा गांधी और शहीद-ए-उम्मत के बीच कई साझा पहलू पाए जाते हैं; दोनों उच्च मूल्यों के धारक, मानवीय सिद्धांतों के पाबंद और अपने-अपने राष्ट्र के प्रिय नेता थे। यही कारण है कि जब भारत में सर्वोच्च नेता की शहादत की दुखद खबर फैली, तो लोगों ने इस दुःख को इस प्रकार व्यक्त किया जैसे कोई करीबी रिश्तेदार दुनिया से चला गया हो। यह अहसास केवल शिया समुदाय तक सीमित नहीं था, बल्कि सुन्नी, हिंदू, सिख और ईसाई समुदाय ने भी पूरे जोश के साथ शोक व्यक्त किया और हत्यारों से घृणा की घोषणा की।

भारत में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि ने अपने भाषण में कहा कि ईरान और शहीद-ए-उम्मत के हत्यारे अमेरिका और इज़राइल न केवल ईरान के, बल्कि पूरी मानवता के दुश्मन हैं। उन्होंने मीनाब (ईरान) के मदरसे पर बमबारी का हवाला देते हुए कहा कि इस क्रूर हमले में 170 से अधिक मासूम बच्चों को शहीद किया गया, जबकि तेहरान के महात्मा गांधी अस्पताल को भी निशाना बनाया गया। हज़ारों निर्दोष लोगों की हत्या के बावजूद ये ताकतें गर्व के साथ पूरे राष्ट्र को मिटाने की बात करती हैं।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया एक ओर अमेरिका और इज़राइल जैसे मानवता-विरोधी तत्वों को देख रही है और दूसरी ओर ईरान को, जो उच्च मानवीय मूल्यों का प्रवर्तक है और इमाम हुसैन (अ) के रास्ते पर चलते हुए अत्याचार के सामने सिर नहीं झुकाता, चाहे सिर कटाना ही क्यों न पड़े।
इस अवसर पर मौलाना आबिद अली, मौलाना अब्बास हुसैन और मौलाना सैयद इनाम भी उपस्थित थे और उन्होंने भी भाषण दिए।

विशाखापट्टनम के बाद लगभग तीन सौ किलोमीटर का सफर तय करते हुए यह काफिला राजमंड्री पहुँचा, जहाँ युवाओं ने भारत में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि का गर्मजोशी से स्वागत किया। मस्जिद-ए-ज़हरा (स.अ.) में आपने ज्ञानवर्धक भाषण दिया। बाद में उसी शहर की प्रसिद्ध सुन्नी मस्जिद 'जामेअ लब्बाबीन' में भी भाषण दिया, जहाँ मुस्लिम एकता के महत्व पर अत्यंत तर्कसंगत और अर्थपूर्ण वार्ता करते हुए शहीद-ए-उम्मत के एकता संबंधी वक्तव्यों और व्यावहारिक कदमों की ओर संकेत किया। इस अवसर पर मस्जिद विद्वानों, शेखों और नमाजियों से ठसाठस भरी हुई थी।

राजमंड्री के बाद डॉ. हकीम इलाही अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ लगभग 80 किलोमीटर दूर शिया बहुल क्षेत्र नागरम पहुँचे, जहाँ सैकड़ों युवाओं ने शानदार स्वागत किया और ईरान तथा ईरान के सर्वोच्च नेता के समर्थन में नारे लगाए। अज़ाख़ाना-ए-मंज़िल-ए-कर्बला में भाषण देते हुए हुज्जतुल-इस्लाम हकीम इलाही ने इस क्षेत्र के मोमिनिन और युवाओं की धार्मिक और क्रांतिकारी जागरूकता की प्रशंसा की, विशेष रूप से हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन मौलाना सैयद अब्बास बाक़री (अध्यक्ष, आंध्र प्रदेश शिया उलेमा बोर्ड) के प्रयासों को सराहनीय बताया और उनका आभार व्यक्त किया।

नागरम में युवाओं द्वारा मीनाब के मज़लूम बच्चों की याद में आयोजित प्रदर्शनी की भी प्रशंसा की, जिसे देखकर हर आँख अश्रुपूरित थी। इस अवसर पर विलायत एजुकेशन एंड वेलफेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष मौलाना अब्बास बाक़री ने भारत में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि हुज्जतुल-इस्लाम हकीम इलाही को "विलायत शैक्षिक केंद्र" का दौरा कराया, जहाँ उन्होंने संस्थान के तहत चल रही धार्मिक कक्षाओं और अन्य सेवाओं पर संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की। मौलाना अकबर शाह, मौलाना मुहम्मद इस्माइल और अन्य विद्वानों से भी परिचय कराया गया।

अपने दौरे के दौरान, तीनों शहरों में डॉ. हकीम इलाही ने आयोजकों, मीडिया प्रतिनिधियों और पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने पूरी यात्रा में भरपूर सहयोग और सुरक्षा प्रदान की। इन स्थानों पर स्थानीय और आसपास के विद्वानों, जुमा और जमाअत के इमामों ने भी भाग लिया और अपनी प्रभावशाली भूमिका का प्रदर्शन किया।
इस यात्रा में साथ रहे मौलाना सैयद तक़ी हैदर तक़वी ने डॉ. हकीम इलााही के फ़ारसी वक्तव्यों का उत्कृष्ट अनुवाद प्रस्तुत किया, जबकि डॉ. हैदर रज़ा ज़ाबित ने नागरम में भाषण देते हुए ईरान के इस्लामी अधिकार पर प्रकाश डाला। इसी प्रकार मौलाना सैयद अब्बास बाक़री (सरकारी शिया क़ाज़ी) ने भी अपने भाषणों में इस्लामी क्रांति और ईरान-इराक युद्ध में ईरान की सफलताओं का उल्लेख किया।
नागरम के बाद हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन हकीम इलाही अली नक़ी पालम और मचलीपट्टनम के आगामी कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए रवाना हुए। गौरतलब है कि यह दौरा अपने शैक्षिक, धार्मिक और क्रांतिकारी प्रभावों के मामले में अत्यंत सफल और यादगार रहा।
आपकी टिप्पणी