हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत बिहार उल अनवार किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
امیرالمؤمنین علی علیهالسلام:
فَوَاللَّهِ لاَ أَغْضَبَتْنِی وَ لاَ عَصَتْ لِی أَمْراً وَ لَقَدْ کُنْتُ أَنْظُرُ إِلَیْهَا فَتَنْکَشِفُ عَنِّی الْهُمُومُ والأَحْزَانُ
हज़रत अमीरुल मोमिनीन अली (अ) ने फ़रमाया:
अल्लाह की क़सम! फ़ातिमा (स) ने कभी मुझे क्रोधित नहीं किया और न ही कभी किसी मामले में मेरी अवज्ञा की। और मैं जब भी उनकी ओर देखता था, तो मेरे सारे ग़म और चिंताएँ दूर हो जाती थीं।
बिहार उल अनवार, भाग 43, पेज 134
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