बिहार उल-अनवार किताब (23)
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इस्लामी कैलेंडरः
धार्मिकक़ुम के लोगों में से एक व्यक्ति की लोगों को हक़ की दावत
इमाम मूसा काज़िम (अ) ने एक रिवायत का ज़िक्र किया है जिसमें क़ुम का एक आदमी लोगों को हक़ की दावत की ओर इशारा किया है।
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धार्मिकक़यामत मे हज़रत अब्बास (अ) का मक़ाम
हौज़ा इमाम ज़ैनुल आबेदीन (अ) ने एक रिवायत मे हज़रत अब्बास (अ) के मक़ाम की ओर इशारा किया है।
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दिन की हदीस:
धार्मिकलोगों की खिदमत करना अल्लाह की नेमत हैृ
हौज़ा / इमाम हुसैन अ.स. ने एक रिवायत में लोगों की ज़रूरतों की पूर्ति को इलाही नेमत बताया है।
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धार्मिकहसद करने वाले की ज़िंदगी लज़्ज़त से वंचित
हौज़ा / हज़रत अली (अ) ने एक हदीस में इंसान की ज़िंदगी में हसद के सबसे बुरे असर के बारे में बताया है।
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धार्मिकअहले-बैत (अ) से प्यार करने वाले का मानक
हौज़ा / हज़रत इमाम महदी (अ) ने एक रिवायत में अहले-बैत (अ) के प्यार के बेसिक मानक बताए हैं।
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धार्मिकनेमतो मे बढ़ोतरी का राज़
हौज़ा / इस रिवायत में इमाम मुहम्मद बाक़िर (अ) ने बंदों की शुक्रगुज़ारी और अल्लाह की नेमतों के लगातार बने रहने के दरमियान के रिश्ते की तरफ़ इशारा किया है।
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इस्लामी कैलेंडरः
धार्मिकइमाम महदी (अ) हमें नहीं भूलते
हौज़ा/ इमाम महदी (अ) ने अपने एक ख़ुतबे में शियो के प्रति अपने विशेष ध्यान का संकेत दिया है।
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धार्मिकअगर ज़ुल्म, ज़ुहूर का ज़मीना है, तो फ़िर उससे जंग क्यो
हौज़ा / ज़ुल्म और इमाम ज़ामाना (अ) के ज़ुहूर के बीच हमेशा चर्चा होती रही है। क्या ज़्यादा ज़ुल्म, ज़ुहूर के लिए ज़मीना साज़ है, या फिर ये इस बात का मतलब है कि इंसान को और तैय्यार होना चाहिए ताकि…
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दिन की हदीसः
धार्मिकग़लती करने वाले को माफ़ी मांगने का समय दो
हौज़ा / इमाम हसन मुज्तबा (अ) ने अपने ज्ञानपूर्ण शब्दों में ग़लती करने वाले को माफ़ करने और उसे माफ़ी मांगने का समय देने पर ज़ोर दिया है।
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दिन की हदीसः
धार्मिकआयु और जीवन बढ़ाने का तरीक़ा
हौज़ा / हज़रत इमाम हुसैन (अ) ने एक रिवायत में सिले रहम बनाए रखने के महत्व को समझाया है।
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दिन की हदीसः
धार्मिकहलाल जीविका का महत्व
हौज़ा/ पैग़म्बर (स) ने एक परंपरा में इबादत के सबसे महत्वपूर्ण तत्वों का वर्णन किया है।
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दिन की हदीसः
धार्मिकसच्ची कंजूसी क्या है?
हौज़ा / इमाम हसन मुज्तबा (अ) ने एक रिवायत में कंजूसी की परिभाषा बताई है।
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आदर्श समाज की ओर (इमाम महदी अलैहिस्सलाम से संबंधित श्रृंखला) भाग - 2
धार्मिकइमाम की ज़रूरत क्या है?
हौज़ा / शिया मत का मानना है कि अल्लाह के बंदों के मार्गदर्शन का सिलसिला पैग़म्बरों, ख़ासकर हज़रत मुहम्मद (स) के बाद, "इमामत" के ज़रिए जारी रहा है। ज़मीन कभी भी अल्लाह के ख़लीफ़ा (इमाम) से ख़ाली…