हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , लखनऊ / जामिया सैयद अहमद शहीद मलीहाबाद लखनऊ में शिक्षकों एवं अध्यापकों के लिए एक दिवसीय "तदरीबुल मुआल्लिमीन वर्कशॉप" का आयोजन किया गया। इस प्रोग्राम का उद्देश्य अहले सुन्नत मदरसों और स्कूलों के शैक्षिक एवं तर्बियती सिस्टम को और अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाना था।
यह प्रोग्राम 19 मई 2026, मंगलवार को मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी के संरक्षण में आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से आए उलेमा, शिक्षकों और अध्यापकों ने भाग लिया।
वर्कशॉप की शुरुआत तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से हुई, जबकि विभिन्न वक्ताओं ने तालीम, तर्बियत और दीनी तालीम के संबंध में महत्वपूर्ण विषयों पर भाषण दिए।
पहला भाषण मौलाना अब्दुल मोईद नदवी ने बच्चों का मनोविज्ञान और उनकी तर्बियत" विषय पर दिया। उन्होंने शिक्षकों पर जोर दिया कि वे बच्चों की मानसिक स्थिति और मनोवैज्ञानिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षण कार्य करें, ताकि बेहतर शैक्षिक परिणाम प्राप्त किए जा सकें।
इसके बाद मौलाना मोहम्मद अकरम प्रतापगढ़ी ने हिफ्ज़ के निज़ाम और उसके तरीक़े-कार" पर बात करते हुए तालिबों की नियमित उपस्थिति और व्यवस्थित शैक्षिक प्रणाली की महत्वता बताई। उन्होंने कहा कि कुरआन को पढ़ना सीखना पूरा करने के बाद हिफ्ज़ शुरू करना अधिक प्रभावी होता है।
वर्कशॉप के तीसरे सत्र में मौलाना मुफ़्ती मोहम्मद शाहजहाँ नदवी ने "कुरबानी के अहकाम और मसाइल" पर भाषण दिया और प्रतिभागियों के सवालों के जवाब भी दिए।
प्रोग्राम का विशेष भाषण जमीयत शबाबुल इस्लाम इंडिया के जनरल सेक्रेटरी मौलाना सैयद मोहम्मद यूसुफ हुसैनी नदवी ने किया। उन्होंने शैक्षिक संस्थानों में हुस्न-ए-अखलाक सब्र व तहम्मुल हिकमत और ज़िम्मेदाराना तरीक़-ए-अमल की महत्ता पर प्रकाश डाला और शिक्षकों को तालिबों के लिए नमूना अमली बनने की नसीहत की।
इस अवसर पर जामिया के पुराने उस्ताद मौलाना मोहम्मद सनाउल्लाह नदवी ने भी अपने अनुभवों और प्रेक्षणों को उपस्थित लोगों के समक्ष प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों ने वर्कशॉप को फायदेमंद और तर्बियती दृष्टि से प्रभावी बताया।
प्रोग्राम का समापन दुआ के साथ हुआ, जबकि निज़ामत के फ़राइज़ मौलाना वकील अहमद जमाली ने अंजाम दिए।

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