शनिवार 23 मई 2026 - 22:43
हज़रत इमाम मुहम्मद बाकिर अ.स. ने ऊलूम ए ईलाही के प्रसार के लिए बेशकीमती सेवाएं अंजाम दीं।मौलाना डॉ. सैयद मुहम्मद नजफी

हौज़ा / जामे अली मस्जिद हौज़ा ए इल्मिया जामिया अल-मुंतज़िर मॉडल टाउन में मौलाना डॉ. सैयद मुहम्मद नजफी ने जुमआ का खुत्बा देते हुए कहा कि पांचवें ताजदार-ए-इमामत हज़रत इमाम मुहम्मद बाकिर अलैहिस्सलाम ने ईश्वरीय ज्ञान के प्रसार के लिए बेशकीमती सेवाएं अंजाम दीं। आप 7 ज़िलहिज्जा को 57 वर्ष की आयु में शहीद हुए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , जामे अली मस्जिद हौज़ा ए इल्मिया जामिया अलमुंतज़िर मॉडल टाउन में मौलाना डॉ. सैयद मुहम्मद नजफी ने जुमआ के खुत्बे में कहा कि पांचवें ताजदार-ए-इमामत हज़रत इमाम मुहम्मद बाकिर (अ.स.) ने ईश्वरीय ज्ञान के प्रसार के लिए बेशकीमती सेवाएं अंजाम दीं।आप 7 ज़िलहिज्जा को 57 वर्ष की आयु में शहीद हुए।

बाकिरुल उलूम' के नाम से प्रसिद्ध इमाम के बहुत प्रसिद्ध शिष्य हैं। आप शक्ल-ओ-सूरत और आदतों में अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद मुस्तफा स.ल.व.व. से मिलते-जुलते थे।

उन्होंने कहा कि इमाम बाकिर अ.स. की इमामत के शुरुआती वर्षों में हज़रत उमर बिन अब्दुलअज़ीज़ (र.अ.) की सरकार ने बाग़-ए-फ़दक को अहल-ए-बैत (अ.स.) को वापस कर दिया और अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अ.स.) पर किए जाने वाले गालियों व श्राप को भी बंद करवा दिया गया।

उन्होंने कहा कि इमाम बाकिर (अ.स.) के पूज्य पिता हज़रत इमाम ज़ैनुल आबिदीन (अ.स.) और माता फातिमा बिन्ते इमाम हसन (अ.स.) हैं, जिनकी उपाधि 'सिद्दीक़ा' है।

डॉ. सैयद मुहम्मद नजफी ने कहा कि इमाम जाफ़र सादिक़ अ.स. का फरमान है कि उनके पूज्य पिता इमाम मुहम्मद बाकिर (अ.स.) हर समय ज़िक्र-ए-ख़ुदा में मशगूल रहते थे।

उन्होंने कहा कि रसूलुल्लाह (स.ल.व.) ने फरमाया,अगर मर्द अच्छा और खूबसूरत कपड़ा पहनेगा तो अल्लाह तआला उनकी महिलाओं की इज़्ज़त और इफ्फत में इज़ाफा फरमाएगा। महान इस्लामिक विचारक शहीद मुर्तज़ा मुतहहरी फरमाते हैं कि दीनी मामलात में लोगों की परवाह नहीं करनी चाहिए, अपने काम के साथ मुख़लिस होकर केवल अल्लाह के लिए काम अंजाम देने चाहिएं।

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