हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, याम शिया टीवी चैनल, हैदराबाद (दक्कन) की ओर से भारत के विभिन्न शहरों में नहजुल बलाग़ा पर आधारित एक शैक्षिक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें पश्चिम बंगाल के शहर कोलकाता और मुर्शिदाबाद में इदारा-ए-इस्लामी तालीमात कोलकाता (इस्लामी शिक्षा संस्थान, कोलकाता) के अधीन छात्र-छात्राओं ने भरपूर भाग लेते हुए उल्लेखनीय सफलताएँ हासिल कीं।
यह शैक्षिक कार्यक्रम मौलाना मोहम्मद तैय्यब अली अंसारी क़ुमी और मौलाना सैयद अहसन नक़वी (इमाम-ए-जुमा वल जमात, चौक शाही जामा मस्जिद, मुर्शिदाबाद) की देखरेख में आयोजित किया गया। प्रतियोगिता में कुल 77 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया, जिनमें से 29 छात्र-छात्राओं ने असाधारण योग्यताओं का प्रदर्शन करते हुए उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की।
सफल होने वालों में:
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13 छात्र-छात्राओं ने 600 में से पूरे 600 अंक प्राप्त किए,
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8 छात्र-छात्राओं ने 599/600 अंक प्राप्त किए,
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जबकि 8 छात्र-छात्राओं ने 598/600 अंक प्राप्त कर कोलकाता और मुर्शिदाबाद के मोमिनीन का सिर फक्र से ऊँचा कर दिया।
प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन और उनके सम्मान में "पुरस्कार वितरण समारोह" का आयोजन किया गया, जिसमें प्रत्येक छात्र को मेडल, सर्टिफिकेट और बतौर कॉमन प्राइज़ टैब बैग प्रदान किया गया। इसी प्रकार प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को विशेष पुरस्कारों से नवाज़ा गया।
इसके अतिरिक्त, सफल छात्रा नरजिस फातिमा बिन्त सैयद नूर हुसैन (निवासी मटियाब्रुज), जो हैदराबाद (दक्कन) के लिए चयनित हुई थीं, को इदारा-ए-इस्लामी तालीमात की ओर से इराक़ की पवित्र यात्रा (ज़ियारत) का विशेष पुरस्कार भी प्रदान किया गया।
पुरस्कार वितरण समारोह:
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शनिवार, 23 मई 2026 को इमामबाड़ा बीबी अनारू साहिबा, कोलकाता में,
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जबकि सोमवार, 25 मई 2026 को किताबख़ाना-ए-शहीद हज़रत आयतुल्लाह उल-उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई, चौक शाही जामा मस्जिद, मुर्शिदाबाद में आयोजित किए गए।
इन समारोहों में छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन करने के लिए विद्वान गण: हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना शेख़ इलियास हुसैन, मौलाना सैयद अमान हैदर रज़वी, मौलाना डॉक्टर रिज़वान उस सलाम खान, मौलाना मुकब्बर हसन खान, मौलाना सैयद अहसन नक़वी और ज़ाकिर-ए-अहलेबैत सैयद रज़ा अली रज़वी ने शिरकत की तथा अपने प्रकाशमय भाषणों के माध्यम से छात्र-छात्राओं की शैक्षिक एवं धार्मिक शिक्षा पर बल दिया।
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