रविवार 7 जून 2026 - 13:46
शिया उलेमा और ख़ुम्स के खिलाफ कार्रवाई सांप्रदायिक प्रतिशोध है: जमीयत अल-विफ़ाक़ बहरैन

बहरैन की शिया राजनीतिक एवं धार्मिक संस्था जमीयत अल-विफ़ाक़ इस्लामी ने शिया उलेमा की गिरफ्तारियों और ख़ुम्स से संबंधित बहरैन की अभियोजन प्राधिकरण के हालिया बयान को "एक बड़ी शर्मनाक घटना" करार देते हुए सरकार पर सांप्रदायिक नीति अपनाने का आरोप लगाया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जमीयत अल-विफ़ाक़ इस्लामी बहरीन ने शिया उलेमा की गिरफ्तारियों और ख़ुम्स के धार्मिक दायित्व से जुड़े अभियोजन पक्ष के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि अभियोजन विभाग अब एक कानूनी संस्था के बजाय राजनीतिक और सुरक्षा एजेंसी का रूप ले चुका है तथा लोगों को भ्रमित करने के लिए विरोधाभासी और निराधार आरोप लगा रहा है।

अल-विफ़ाक़ ने अपने बयान में कहा कि गिरफ्तार किए गए उलेमा के विरुद्ध लगाए गए आरोप शुरू से ही कमजोर और अविश्वसनीय हैं। संगठन के अनुसार ये कार्रवाइयाँ हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों के बाद शिया समुदाय के विरुद्ध बदले की भावना से की जा रही हैं। बयान में कहा गया कि बहरीन में चालीस से अधिक उलेमा को निशाना बनाया गया है, जबकि वे विभिन्न धार्मिक मदरसों और हौज़ों से जुड़े प्रतिष्ठित धार्मिक व्यक्तित्व हैं, जो लंबे समय से प्रचार-प्रसार, शिक्षण और सामाजिक सेवाओं में लगे हुए हैं।

बयान में आगे कहा गया कि ख़ुम्स और अन्य धार्मिक अधिकार (शरई हक़ूक़) शिया मत का मूलभूत हिस्सा हैं तथा उनकी वसूली और वितरण एक धार्मिक कर्तव्य है। इन धार्मिक दायित्वों को मनी लॉन्ड्रिंग या सुरक्षा संबंधी अपराध बताना न केवल न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता पर भी आघात है। अल-विफ़ाक़ ने स्पष्ट किया कि उलेमा धार्मिक प्रतिनिधियों के रूप में इन निधियों को प्रतिष्ठित मरजा-ए-तक़लीद (उच्च धार्मिक प्राधिकारियों) तक पहुँचाते हैं, न कि किसी सरकार या राजनीतिक दल को।

संगठन ने यह भी कहा कि गिरफ्तार किए गए उलेमा का राजनीति से कोई संबंध नहीं है और उनकी सभी गतिविधियाँ खुले तौर पर संचालित होती रही हैं। अल-विफ़ाक़ के अनुसार वर्तमान कार्रवाई वास्तव में शिया धार्मिक प्रतीकों, आस्थाओं और फ़िक़्ही (धार्मिक विधिशास्त्रीय) सिद्धांतों को निशाना बनाने का प्रयास है, जिससे जाफ़री मत के अनुयायियों में गहरी चिंता व्याप्त है।

जमीयत अल-विफ़ाक़ ने मांग की है कि इन मामलों की समीक्षा शिया धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों की सलाह से की जाए तथा गिरफ्तार उलेमा को शीघ्र न्याय प्रदान किया जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार की नीतियाँ जारी रहीं तो बहरीन में धार्मिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता के लिए गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।

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