बुधवार 24 जून 2026 - 05:38
मुहर्रम के दिनों में रास अल-हुसैन मस्जिद बंद किए जाने पर मिस्र के शियो ने जताई चिंता

मिस्र के शिया नागरिक गहरी चिंता के साथ उन प्रतिबंधों को देख रहे हैं जिनका सामना उन्हें केवल अपने धार्मिक विश्वासों की वजह से करना पड़ रहा है। जबकि मिस्र का संविधान सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के धार्मिक अधिकार और स्वतंत्रता प्रदान करता है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, मिस्र के शिया समुदाय ने एक बयान जारी कर देश में धार्मिक गतिविधियों पर लगाई जा रही पाबंदियों को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने शिया नागरिकों के साथ किसी भी प्रकार के भेदभावपूर्ण व्यवहार को रोकने की मांग की है।

बयान में कहा गया है कि मिस्र के शिया नागरिक गहरी चिंता के साथ उन प्रतिबंधों को देख रहे हैं जिनका सामना उन्हें केवल अपने धार्मिक विश्वासों की वजह से करना पड़ रहा है। जबकि मिस्र का संविधान सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के धार्मिक अधिकार और स्वतंत्रता प्रदान करता है।

शिया समुदाय ने कहा कि उन्हें उस समय आश्चर्य हुआ जब वक्फ मंत्रालय ने इमाम हुसैन (अ) के पवित्र स्थल को मरम्मत और पुनर्निर्माण के नाम पर बंद करने की घोषणा की। उनका कहना है कि यह कदम लगभग हर साल उन्हीं धार्मिक अवसरों के दौरान उठाया जाता है, जब शिया समुदाय बड़ी संख्या में वहां जाकर श्रद्धांजलि अर्पित करता है और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करता है। इससे इस बार-बार होने वाली बंदी के वास्तविक कारणों को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

बयान में कहा गया कि मिस्र के शिया देश के नागरिक समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उन्हें संविधान तथा कानून द्वारा दिए गए सभी नागरिक अधिकार प्राप्त हैं। इनमें अपने धार्मिक अनुष्ठानों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न करने तथा पवित्र स्थलों की ज़ियारत करने का अधिकार भी शामिल है।

शिया समुदाय ने संबंधित सरकारी संस्थाओं से अपील की कि वे सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करें, धार्मिक विश्वास या संप्रदाय के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करें और नागरिकता, समानता तथा कानून के शासन के मूल्यों को मजबूत बनाने के लिए कार्य करें।

बयान के अंत में कहा गया कि धार्मिक और सांप्रदायिक विविधता का सम्मान सामाजिक स्थिरता की बुनियाद है। साथ ही, यह संविधान और मानवाधिकारों के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

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