हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हौज़ा ए इल्मिया ईरान की सुप्रीम काउंसिल ने एक शोक संदेश जारी करते हुए नजफ़ अशरफ़ के जलीलुल-क़द्र मरजा-ए-तक़लीद हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा हाजी शेख़ मुहम्मद इस्हाक़ फ़य्याज़ (र) के इंतिकाल पर गहरे दुःख और शोक का इज़हार किया है।
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) से रिवायत है कि आपने फ़रमाया,जब कोई मोमिन फ़क़ीह दुनिया से रुख़्सत होता है तो इस्लाम में ऐसा शिगाफ़ पैदा हो जाता है जिसे कोई चीज़ भर नहीं सकती।
हौज़ा ए इल्मिया नजफ़ अशरफ़ के अज़ीम फ़क़ीह और मरजा-ए-तक़लीद हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा हाजी शेख़ मुहम्मद इस्हाक़ फ़य्याज़ (र) के इंतिकाल की ख़बर ने गहरे रंज व आलम में मुब्तला कर दिया है।
मरहूम आयतुल्लाहिल उज़्मा फ़य्याज़ (र) नजफ़ अशरफ़ के इल्मी मकतब की सबसे नुमायाँ शख़्सियतों में शुमार होते थे। आपने बअसी तानाशाही के दौर में इराक़ पर मुसल्लत सख़्त दबावों और ख़तरों के बावजूद इस्तिक़ामत के साथ नजफ़ अशरफ़ में क़ियाम किया और इस मुक़द्दस इल्मी मरकज़ को कभी तर्क नहीं किया।
आपने अपनी बाबरकत ज़िंदगी क़ुरआन करीम की तालीमात के फ़रोग़, अहलेबैत इस्मत व तह़ारत (अ) की सक़ाफ़त की तर्वीज़, फ़ाज़िल उलमा की तरबियत, हौज़ात-ए-इल्मिया की ख़िदमत और उम्मत-ए-मुस्लिमा की दीनी व फ़िक्री ज़रूरतों को पूरा करने के लिए वक़्फ़ कर दी।आपने फ़िक़्ह और उसूल-ए-फ़िक़्ह के मैदान में ग़ैरमामूली इल्मी आसार छोड़े, जो हमेशा अहल-ए-इल्म के लिए सरमाया-ए-इफ़्तिख़ार बना रहेंगा।
हौज़ात ए इल्मिया की आला काउंसिल इस अज़ीम सानिहे पर हज़रत बक़िय्यतुल्लाहिल आज़म इमाम महदी (अ), मराजे-ए-इज़ाम, रहबर-ए-इंक़िलाब-ए-इस्लामी, हौज़ात ए इल्मिया ख़ुसूसन हौज़ा-ए-इल्मिया नजफ़ अशरफ़, मरहूम के शागिर्दों, अकीदतमंदों और उनके मुअज्ज़ज़ ख़ानदान की ख़िदमत में ताज़ियत और तसलियत पेश करती है।
सुप्रीम काउंसिल
हौज़ा-ए-इल्मिया ईरान
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