शनिवार 4 जुलाई 2026 - 22:09
मौलाना ज़ैग़म रिज़वी: क़ुरआन में वर्णित अतीत की हर घटना क़यामत तक वर्तमान और भविष्य का दर्पण है

मौलाना सय्यद ज़ैग़म रिज़वी ने मुबारकपुर में आयोजित मजलिस-ए-अज़ा को संबोधित करते हुए कहा कि क़ुरआन में वर्णित अतीत की हर घटना क़यामत तक वर्तमान और भविष्य का दर्पण है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पवित्र क़ुरआन में अल्लाह तआला ने जितनी भी प्राचीन घटनाओं का उल्लेख किया है, वे केवल पुराने किस्से नहीं हैं, बल्कि पूर्णतः सत्य और वास्तविकता पर आधारित हैं। ये घटनाएँ मानवता के लिए शिक्षा, चेतावनी और मार्गदर्शन का स्रोत हैं।

उन्होंने कहा कि क़ुरआन के अर्थ और संदेश किसी एक युग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अतीत की हर क़ुरआनी घटना क़यामत तक वर्तमान और भविष्य का प्रतिबिंब है। उदाहरण के तौर पर, सूरह अल-कहफ़ में दो ऐसे मानव समूहों याजूज और माजूज का उल्लेख है, जिन्हें अत्यंत ख़तरनाक, हिंसक, आतंक फैलाने वाले, अत्याचारी, ज़ालिम, ग़ासिब, विश्वासघाती तथा उपद्रव और फ़साद फैलाने वाला बताया गया है। इसके साथ ही एक अत्यंत न्यायप्रिय, नेक, शक्तिशाली, निष्पक्ष और सुधारक शासक ज़ुलक़रनैन का भी उल्लेख मिलता है। उन्होंने कहा कि तफ़सीर, इतिहास और हदीसों के प्रकाश में इन घटनाओं का अध्ययन करने के बाद यह समझा जा सकता है कि वर्तमान समय में चरित्र की दृष्टि से याजूज और माजूज की तुलना बहुत हद तक नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप से की जा सकती है।

इन विचारों का व्यक्तित्व हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सय्यद ज़ैग़म रिज़वी इलाहाबादी (निवासी ईरान) ने उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले के मुबारकपुर की पुरानी बस्ती बिखरी स्थित हुसैनिया इमामबाड़े के प्रांगण में आयोजित वार्षिक पाँच दिवसीय मजलिसों के तेरहवें चरण की दूसरी मजलिस में व्यक्त किया। इस कार्यक्रम का आयोजन अंजुमन अब्बासिया रजिस्टर्ड, पुरानी बस्ती बिखरी, मुबारकपुर की आयोजन समिति द्वारा 3 जुलाई, शुक्रवार को रात्रि 9 बजे किया गया।

मौलाना ज़ैग़म रिज़वी: क़ुरआन में वर्णित अतीत की हर घटना क़यामत तक वर्तमान और भविष्य का दर्पण है

मौलाना ने आगे कहा कि जो लोग क़ुरआन और अहले बैत से दूरी रखते हैं, उसका वास्तविक कारण उनकी अज्ञानता और सही पहचान का अभाव है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता इस बात की है कि सत्य को सत्य के तरीके से लोगों तक पहुँचाया जाए। जैसा कि कर्बला की घटना के बाद इमाम ज़ैनुल आबिदीन और हज़रत ज़ैनब (सलामुल्लाह अलैहिमा) ने कैद की अवस्था में कूफ़ा और शाम के बाज़ारों तथा दरबारों में सत्य का संदेश इस प्रकार प्रस्तुत किया कि जो लोग पहले उनके विरोधी थे, वे भी क़ुरआन और अहले बैत से जुड़ गए तथा इमाम हुसैन के शोक मनाने वाले और उनके समर्पित अनुयायी बन गए।

अंत में मौलाना ने इमाम हुसैन की शहादत के बाद कर्बला से कूफ़ा और कूफ़ा से शाम तक अहले हरम की कैद और उनके दर्दनाक कष्टों का वर्णन किया। इसे सुनकर उपस्थित लोगों की आँखें नम हो गईं।

कार्यक्रम की शुरुआत अली रज़ा और उनके साथियों की सोज़ख़्वानी से हुई। मंच संचालन की ज़िम्मेदारी मौलाना हसन मोहम्मद बिखरवी (निवासी लेबनान) ने निभाई।

इस अवसर पर मौलाना इब्ने हसन अमलवी वाइज़, मौलाना नसीरुल महदी क़ुम्मी, मौलाना इक्तेदार हुसैन क़ुम्मी, मौलाना ग़मख़्वार हुसैन क़ुम्मी, मौलाना जवाद हैदर, मौलाना नफ़ीस, मौलाना मज़ाहिर अनवर, मास्टर शुजाअत, मास्टर मुश्ताक ख़ान, डॉक्टर सलमान अख़्तर, अब्बास अहमद ग़दीरी, मोहम्मद क़ासिम जवादी सहित बड़ी संख्या में मोमिनीन उपस्थित रहे।

टैग्स

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
captcha