गुरुवार 9 जुलाई 2026 - 10:48
शहीद रहबर द्वारा बिछाई गई सही राह पर व्यवस्था की गाड़ी बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ रही है

हौज़ा / हज़रत मासूमा स.अ.के हरम के ख़तीब हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद हुसैन मोमेनी ने कहा कि शहीद रहबर की शहादत से व्यवस्था में कोई रुकावट पैदा नहीं हुई, बल्कि युवाओं में जागरूकता और शहादत की भावना की नई लहर पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि दो वर्ष पहले राष्ट्रपति को शहीद किया गया, पिछले वर्ष सैन्य कमांडरों और वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बनाया गया, लेकिन दुश्मन इस व्यवस्था की गति को रोकने में सफल नहीं हुआ। शहीद रहबर ने सही दिशा निर्धारित कर दी थी और यही कारण है कि व्यवस्था की गाड़ी लगातार आगे बढ़ रही है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हज़रत मासूमा स.अ.के हरम के ख़तीब हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद हुसैन मोमेनी ने कहा कि शहीद रहबर की शहादत से व्यवस्था में कोई रुकावट पैदा नहीं हुई, बल्कि युवाओं में जागरूकता और शहादत की भावना की नई लहर पैदा हुई है।

उन्होंने कहा कि दो वर्ष पहले राष्ट्रपति को शहीद किया गया, पिछले वर्ष सैन्य कमांडरों और वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बनाया गया, लेकिन दुश्मन इस व्यवस्था की गति को रोकने में सफल नहीं हुआ। शहीद रहबर ने सही दिशा निर्धारित कर दी थी और यही कारण है कि व्यवस्था की गाड़ी लगातार आगे बढ़ रही है।

उन्होंने शहीद रहबर की अंतिम यात्रा में जनता की ऐतिहासिक भागीदारी के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लोगों ने इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया। तेहरान, क़ुम, नजफ़ और कर्बला में लाखों लोगों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि जनता अपने नेतृत्व के प्रति गहरी निष्ठा रखती है।

मोमेनी ने कहा कि यह जनसैलाब उन लोगों के लिए भी एक बड़ा संदेश है जो राजनीतिक मतभेदों के माध्यम से समाज में भ्रम फैलाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि जब संघर्ष सत्य और असत्य का हो, तब दल और गुटों का कोई महत्व नहीं रह जाता। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद जनता की भारी भागीदारी ने दुश्मनों को निराश कर दिया।

उन्होंने अंतिम यात्रा के आयोजन में सुरक्षा बलों और सेवकों की सराहना करते हुए कहा कि दुश्मन अशांति फैलाना चाहता था, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने उसकी सभी योजनाओं को विफल कर दिया। उनके अनुसार शहीद रहबर की शहादत ने समाज में एकता और राष्ट्रीय एकजुटता को और मजबूत किया।

मोमेनी ने कहा कि शहीद रहबर लगभग चालीस वर्षों तक जनता के लिए एक पिता की तरह रहे। 86 वर्ष की आयु में वे अपने विरोधियों के हाथों शहीद हुए, लेकिन उनकी शहादत भी उनके मिशन को रोक नहीं सकी। उन्होंने जो मजबूत वैचारिक और संस्थागत आधार तैयार किया था, उसी के कारण व्यवस्था निरंतर आगे बढ़ रही है।

उन्होंने शहीद रहबर की सबसे बड़ी विशेषता उनकी ईश्वर पर अटूट आस्था बताई। उन्होंने कहा कि वे हमेशा लोगों से क़ुरआन की भाषा में संवाद करने की बात करते थे और स्वयं भी क़ुरआन व सुन्नत के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति थे। इस्लामी इतिहास, ईरान, पश्चिम और विभिन्न विषयों पर उनकी गहरी जानकारी उनकी आस्था और क़ुरआनी शिक्षाओं पर अमल का परिणाम थी। वे हर महत्वपूर्ण निर्णय से पहले अल्लाह पर भरोसा करते और दुआ व ज़ियारत का सहारा लेते थे।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि शहीद रहबर की ऐतिहासिक अंतिम यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया कि तमाम दबावों और कठिनाइयों के बावजूद जनता अपने सिद्धांतों पर दृढ़ है। उनकी शहादत ने व्यवस्था को कमज़ोर नहीं किया, बल्कि विशेष रूप से युवाओं में जागरूकता, समर्पण और शहादत की भावना को नई ऊर्जा प्रदान की।

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