हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाहिल उज़्मा हुसैन मज़ाहिरी ने शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनेई के ऐतिहासिक अंतिम संस्कार में ईरान और इराक़ की जनता की बड़ी भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि शहीद नेता और स्वर्गीय इमाम की महान अमानत की रक्षा का एकमात्र मार्ग दूरदर्शी, जागरूक और विवेकशील नेतृत्व का अनुसरण करना है।
आयतुल्लाहिल उज़्मा हुसैन मज़ाहिरी ने शहीद सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार और दफ़्न के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि ईरान और इराक़ में लाखों लोगों की उपस्थिति में संपन्न हुआ यह विशाल अंतिम संस्कार इस्लामी उम्मत की गरिमा, शक्ति और अपने नेता के प्रति अद्वितीय प्रेम का स्पष्ट प्रमाण था। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक दृश्य ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि ईरानी राष्ट्र इस्लाम और इस्लामी क्रांति के उच्च आदर्शों पर दृढ़ता से कायम है, जबकि उसके विरोधियों को निराशा और असफलता का सामना करना पड़ा।
उन्होंने ईरान की जनता को सलाम पेश करते हुए कहा कि यह राष्ट्र हर महत्वपूर्ण अवसर पर इस्लामी मूल्यों और क्रांति के उद्देश्यों की रक्षा में प्रभावी भूमिका निभाता रहा है। उनके अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति की हालिया धमकियाँ भी वास्तव में ईरान की मजबूत जनशक्ति के प्रति भय और असहायता का संकेत हैं।
आयतुल्लाह मज़ाहिरी ने कहा कि शहीद नेता ने अपना पूरा जीवन पूरी निष्ठा के साथ इस्लाम और राष्ट्र की सेवा में समर्पित किया और अंततः अत्याचार तथा आक्रमण के परिणामस्वरूप शहादत प्राप्त की। उन्होंने कहा कि शहीद नेता और उनके परिवार के पवित्र पार्थिव शरीर को इमाम रज़ा की दरगाह के निकट सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया और वे इस्लामी क्रांति की महान अमानत राष्ट्र को सौंपकर चले गए।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आज हमारी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी इसी अमानत की रक्षा करना है और इसका मूल आधार जनता की दूरदर्शिता, एकता, विलायत-ए-फ़क़ीह पर विश्वास तथा क्रांति के जागरूक और विवेकशील नेता का अनुसरण करना है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों के दौरान हुए जनसमूहों और शहीद नेता के ऐतिहासिक अंतिम संस्कार में यही एकता और जागरूकता पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
अंत में आयतुल्लाह मज़ाहिरी ने ईरान की जनता के धैर्य और दृढ़ता की सराहना करते हुए प्रार्थना की कि अल्लाह उन्हें और अधिक सम्मान तथा प्रतिष्ठा प्रदान करे, शहीदों के रक्त का प्रतिशोध ले, इस्लाम के विरोधियों को असफल करे और देश के ज़िम्मेदार अधिकारियों को जनता की सेवा तथा उनकी समस्याओं के समाधान की तौफ़ीक़ प्रदान करे।
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