हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाहिल उज़्मा जावादी आमोली ने सोमवार को उद्योगपतियों और दानदाताओं के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान उनकी सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि अल्लाह कभी अदृश्य सहायता के माध्यम से और कभी जनता की भागीदारी के द्वारा अपने धर्म की सहायता करता है। उन्होंने कहा कि किसी ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि लोग कई महीनों तक इसी उत्साह के साथ मैदान में मौजूद रहेंगे और क्रांति तथा इस्लाम की आवाज को बुलंद करेंगे। उन्होंने शहीद रहबर की सेवाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी महान कुर्बानी के साथ-साथ जनता की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब ईरान में ज़ायोनी शासन के खिलाफ मुसलमानों की सफलता के लिए दुआ की सभा आयोजित करना भी संभव नहीं था, लेकिन आज इस्लामी क्रांति, जनता की दृढ़ता, शहीदों के बलिदानों और अल्लाह पर भरोसे के कारण अमेरिका और इज़राइल ईरान के सामने असहाय और अपमानित हो चुके हैं।
आयतुल्लाह जावादी आमोली ने कहा कि क्रांति के शुरुआती दिनों में सीमित संसाधनों के बावजूद समर्पित लोगों ने बिना किसी सांसारिक लालच के देश की सेवा की। इसलिए आज भी उसी भावना के साथ जनता की सेवा की जा सकती है।
उन्होंने आठ वर्षीय पवित्र रक्षा युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि इस युद्ध में सफलता आधुनिक हथियारों के कारण नहीं, बल्कि जनता के ईमान, साहस और बलिदानों की वजह से प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि देश का वर्तमान सम्मान और सुरक्षा उन्हीं शहीदों की देन है जिन्होंने इस्लाम और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
उन्होंने समाज में मेहनत, उत्पादन और सेवा की भावना को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि गरीबी एक बड़ी सामाजिक समस्या है और सभी की जिम्मेदारी है कि जरूरतमंदों की सहायता करें, रोजगार के अवसर पैदा करें और गरीबी को समाप्त करने के लिए व्यावहारिक प्रयास करें।
अंत में उन्होंने सेवा करने वालों को सलाह दी कि लोगों की बातों से निराश न हों और हमेशा अल्लाह की प्रसन्नता को ध्यान में रखते हुए जनता की सेवा करते रहें।
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