हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , ख़ुरासान-ए-रिज़वी में सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि आयतुल्लाह अहमद आलमुल-होदा ने लाहौर के हौज़ा-ए-इल्मिया उरवतुल वुस्का के प्रमुख और तहरीक-ए-बेदारी उम्मत-ए-मुस्तफ़ा के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम जवाद नक़वी से मुलाक़ात की।
उन्होंने पाकिस्तान में शिया समुदाय की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि लाहौर शियाओं का महत्वपूर्ण केंद्र है और पाकिस्तान के शिया अत्याचार सहने के बावजूद निष्ठावान, समर्पित और अहलुलबैत (अ.स.) के मार्ग के प्रति सदैव वफ़ादार रहे हैं।
आयतुल्लाह आलमुल-होदा ने "शहीद नेता" के निधन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह घटना ईश्वरीय इच्छा का हिस्सा है, जिसकी वास्तविकता को कोई पूरी तरह नहीं समझ सकता और इंसान को अल्लाह के फ़ैसले के सामने समर्पित रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह सैय्यद मुज्तबा ख़ामनेई को शहीद नेता के मार्ग का उत्तराधिकारी बताया और कहा कि उन्हें नेतृत्व के लिए चुने जाने के प्रमुख कारण उनकी न्यायप्रियता, फ़िक़्ही योग्यता, राजनीतिक समझ, प्रशासनिक क्षमता तथा इस्लामी समाज का मार्गदर्शन करने की दूरदर्शिता हैं।
उन्होंने आगे कहा कि आयतुल्लाह सैय्यद मुज्तबा ख़ामनेई शहीद नेता के सबसे निकट रहे हैं और बड़े राजनीतिक एवं रणनीतिक निर्णयों से पूरी तरह परिचित रहे हैं। राजनीतिक सलाहकार के रूप में भी उन्हें व्यापक अनुभव प्राप्त है।
आलमुल-होदा ने कहा कि उनमें युद्धकालीन नेतृत्व, सैन्य कमान की समझ और कठिन परिस्थितियों में प्रभावी प्रबंधन की क्षमता मौजूद है तथा वे बिना किसी पारंपरिक संगठनात्मक ढांचे पर निर्भर हुए भी विभिन्न मामलों का सफलतापूर्वक संचालन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका को सबसे अधिक इस बात ने नाराज़ किया कि इराक में शहीद नेता की अंतिम यात्रा में लाखों लोग शामिल हुए। उनके अनुसार, इस जनसैलाब ने यह संदेश दिया कि वे केवल ईरान के नेता नहीं बल्कि पूरे इस्लामी जगत के नेता माने जाते हैं, और यही बात विरोधियों की नाराज़गी तथा उनके शत्रुतापूर्ण रवैये का कारण बनी।
अंत में आयतुल्लाह आलमुल-होदा ने पाकिस्तान में हुज्जतुल इस्लाम जवाद नक़वी की धार्मिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक सेवाओं की सराहना की तथा उनके और अहलुलबैत (अ.) के सभी सेवकों की सफलता, इस्लाम की सेवा, इस्लामी एकता और अहलुलबैत (अ.स.) की शिक्षाओं के प्रसार के लिए दुआ की।
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