शुक्रवार 24 जुलाई 2026 - 11:50
सुप्रीम लीडर सय्यद मुज्तबा ख़ामेनेई की दृष्टि में "महिलाएँ" मानव पूंजी की निर्माता और उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं

महिलाओं की ज़िम्मेदारी आने वाली पीढ़ियों की परवरिश से शुरू होती है और सामाजिक पूंजी में भागीदारी, सार्वजनिक संस्कृति के विकास, राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय उपस्थिति पर निर्भर करती है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सय्यद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई के वैचारिक दृष्टिकोण में महिला केवल परिवार की एक सदस्य नहीं है, बल्कि किसी राष्ट्र की पहचान, संस्कृति और भविष्य को आकार देने वाला सबसे महत्वपूर्ण तत्व है।

यह एक सामूहिक और प्रेरणादायक विचार है कि इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सय्यद मुज्तबा ख़ामेनेई के अनुसार, महिलाएँ ईरानी राष्ट्र का एक अनिवार्य हिस्सा हैं, जो हर निर्णायक और महत्वपूर्ण चरण में राष्ट्र के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहती हैं। उनके अनुसार महिलाओं की सांस्कृतिक, सामाजिक, मस्जिदों से जुड़ी, स्थानीय समुदायों में और जागरूकता एवं दूरदृष्टि पैदा करने वाली गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी समाज की शक्ति और जीवंतता का महत्वपूर्ण कारण है।

इसी प्रकार मदरसा "शजर-ए-तय्यबा मिनाब" की शहीद छात्राओं की याद इस वास्तविकता को उजागर करती है कि ईरानी महिलाएँ और लड़कियाँ केवल निर्माण और विकास के क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि त्याग, बलिदान और प्रतिरोध के मोर्चों पर भी महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बन सकती हैं।

इस विचार का सार यह है कि इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सय्यद मुज्तबा ख़ामेनेई के दृष्टिकोण में महिला देश की मानव और सामाजिक पूंजी के निर्माण का मूल केंद्र है। मानव पूंजी आने वाली पीढ़ियों की बेहतर शिक्षा और प्रशिक्षण से तैयार होती है, जबकि सामाजिक पूंजी मजबूत परिवार, नैतिक मूल्यों के प्रसार, जनता के विश्वास में वृद्धि और सांस्कृतिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी से बनती है।

इसी कारण इस विचारधारा में महिलाओं की भूमिका कोई द्वितीयक या केवल सहयोगी भूमिका नहीं है, बल्कि विकास, प्रगति और सभ्यता निर्माण की व्यापक रणनीति का एक मूलभूत हिस्सा है।

आज जब दुनिया के कई समाज जनसंख्या में कमी, पारिवारिक व्यवस्था की कमजोरी, सांस्कृतिक पहचान के पतन और नई पीढ़ी की शिक्षा एवं प्रशिक्षण के संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, ऐसे समय में इस विचार का पुनः अध्ययन समाजों की सांस्कृतिक और सामाजिक नीति निर्माण के लिए एक नई दिशा निर्धारित कर सकता है।

ईरान का भविष्य सबसे अधिक उसकी मानव पूंजी की गुणवत्ता पर निर्भर करता है और यह पूंजी किसी भी संस्था से पहले परिवार में तैयार होती है, जहाँ महिला एक माँ, प्रशिक्षक, सांस्कृतिक कार्यकर्ता और समाज की सक्रिय सदस्य के रूप में देश के भविष्य के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इस दृष्टिकोण से देखा जाए तो महिलाओं के बारे में इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सय्यद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई के संदेश केवल नैतिक या पारिवारिक सलाह नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक सभ्यतागत रणनीति को दर्शाते हैं। ऐसी रणनीति जिसमें महिला को केवल परिवार का केंद्र ही नहीं, बल्कि भविष्य की निर्माता, राष्ट्रीय पहचान की संरक्षक, सभ्यता निर्माण करने वाली पीढ़ी की परवरिश करने वाली और इस्लामी गणराज्य ईरान की सॉफ्ट पावर के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक माना गया है।

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