रविवार 13 सितंबर 2026 - 12:08
शिक्षा और प्रशिक्षण के विकास के लिए जनता और सरकार के सभी संसाधनों का उपयोग किया जाए

हौज़ा इल्मिया ईरान के प्रमुख आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी ने शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण रणनीतियाँ बताते हुए कहा कि शिक्षा और प्रशिक्षण के विकास तथा सुधार के लिए जनता और सरकार के सभी संसाधनों और क्षमताओं का उपयोग करना आवश्यक है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हौज़ा इल्मिया ईरान के प्रमुख आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी ने शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण रणनीतियाँ बताते हुए कहा कि आज के इस महत्वपूर्ण दौर और आने वाली परिस्थितियों में बुद्धिजीवियों, विशेषज्ञों, विद्वानों, जिम्मेदार संस्थाओं और विशेष रूप से शिक्षा एवं प्रशिक्षण के बड़े संस्थानों तथा सम्मानित शिक्षकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है और उनकी जिम्मेदारी भी बहुत बड़ी है। इस्लामी प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम करने वालों पर वर्तमान पीढ़ी, युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के संबंध में बड़ी जिम्मेदारी है।

आयतुल्लाह आराफ़ी ने शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था के सामने आने वाली नई समस्याओं और अवसरों की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, परिवार और सरकार की ओर से शिक्षा और प्रशिक्षण की निगरानी और मार्गदर्शन आज तकनीक के तेज़ विकास, सामाजिक परिस्थितियों तथा भौतिकवादी और पश्चिमी संस्कृति के प्रभावों की चपेट में है। इस्लामी व्यवस्था और इस्लाम की शिक्षाओं के अनुसार इस निगरानी और मार्गदर्शन को सुरक्षित रखना आवश्यक है और समय की परिस्थितियों तथा परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए इसे फिर से मजबूत और बेहतर बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने इस महत्वपूर्ण बात पर भी जोर दिया कि स्कूल शिक्षा और प्रशिक्षण का मूल केंद्र और मुख्य आधार है तथा शिक्षक, प्रबंधक और प्रशिक्षण कार्यकर्ता नई पीढ़ी के मार्गदर्शक और निर्माता हैं। एक अच्छे और आदर्श स्कूल की स्थापना तथा शिक्षकों और प्रबंधकों के ज्ञान एवं समझ को बढ़ाने के लिए प्रयास करना सभी की जिम्मेदारी है।

आयतुल्लाह आराफ़ी के अनुसार शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था के सामने मौजूद समस्याएँ, अवसर और महत्वपूर्ण रणनीतियाँ निम्नलिखित हैं:

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इस्लामी प्रशिक्षण केंद्र की बैठक का आयोजन, जिसमें शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र से जुड़े सम्मानित और सक्रिय लोग शामिल हैं, इस्लामी क्रांति के इस संवेदनशील और नए दौर तथा ईरान और इस्लाम के इतिहास के सुख-दुःख भरे हालात के बीच शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था के सामने आने वाली नई समस्याओं और अवसरों का पुनः अध्ययन करने तथा उनके लिए नए और प्रभावी समाधान तलाश करने का एक अच्छा अवसर है।

इस्लामी क्रांति का नया दौर हमारे शहीद नेता, सम्मानित शहीदों, मीनाब के तैयबा स्कूल के कम उम्र शहीदों, ईरान और प्रतिरोध धुरी के शहीदों के बलिदान के साथ शुरू हुआ है। यह दौर तीसरे युद्ध तथा क्रांति और प्रतिरोध धुरी के विचार एवं अमेरिकी-ज़ायोनी वर्चस्व की व्यवस्था के बीच एक बुनियादी और व्यापक संघर्ष से भी जुड़ा हुआ है।

इमाम खुमैनी की विचारधारा, शहीद नेता के मार्गदर्शन और उनके योग्य उत्तराधिकारी, इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता के मार्गदर्शन में ईरान की जागरूक जनता और जागरूक उम्मत, सशस्त्र बलों और प्रतिरोध धुरी के समर्पित कार्यकर्ताओं के बलिदानों के साथ इस नए दौर और इस्लामी क्रांति की नई प्रगति की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

इस महत्वपूर्ण दौर और आने वाली परिस्थितियों में बुद्धिजीवियों, विशेषज्ञों, विद्वानों, जिम्मेदार संस्थाओं और विशेष रूप से शिक्षा एवं प्रशिक्षण के बड़े संस्थानों तथा सम्मानित शिक्षकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है और उनकी जिम्मेदारी भी बहुत बड़ी है। इस्लामी प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम करने वालों पर वर्तमान पीढ़ी, युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के संबंध में बड़ी जिम्मेदारी है। शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान, शिक्षक, प्रशिक्षक और जिम्मेदार प्रबंधक मिलकर आने वाले परिवर्तनों का नेतृत्व कर सकते हैं, नए बड़े अवसर पैदा कर सकते हैं और वर्तमान समस्याओं पर काबू पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मैं शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था से जुड़े सभी सम्मानित लोगों, आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवारने वालों, इस उज्ज्वल क्षेत्र में काम करने वाले सभी लोगों और इस बैठक में शामिल सभी सम्मानित व्यक्तियों को श्रद्धांजलि देते हुए कुछ बातें प्रस्तुत करना चाहता हूँ:

1- शिक्षा और प्रशिक्षण के सामने महत्वपूर्ण समस्याएँ

आज मानव विकास और प्रशिक्षण की यात्रा तथा शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था को अनेक कठिनाइयों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना है। बड़े अवसरों के बावजूद इस क्षेत्र में कई गंभीर समस्याएँ मौजूद हैं, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

क) आज मानव की सोच पर भौतिकवादी विचारों और गैर-धार्मिक सोच का प्रभाव बढ़ रहा है। दुनिया में ज्ञान, तकनीक, जीवन तथा शिक्षा और प्रशिक्षण के अनेक क्षेत्रों में भौतिकवादी सोच हावी होती जा रही है। ऐसे वातावरण में बच्चों, युवाओं और नई पीढ़ी का प्रशिक्षण हो रहा है, जहाँ आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों को कम महत्व दिया जाता है। इसका परिणाम यह है कि पश्चिमी सभ्यता की बाहरी प्रगति और चमक-दमक के बावजूद मानव अपनी शुद्ध प्रकृति तथा धार्मिक और आध्यात्मिक मूल्यों से दूर होता जा रहा है।

ख) भौतिकवादी सोच के साथ तकनीक और इंटरनेट के तेज़ विकास ने मानव और युवाओं के लिए एक नई दुनिया पैदा कर दी है। इसके बहुत से लाभ हैं, लेकिन इसने मानव की सोच, आत्मा और मन तथा शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था के लिए कई नई समस्याएँ भी उत्पन्न की हैं। इसके साथ ही मानव मस्तिष्क और व्यवहार से संबंधित विज्ञानों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता में होने वाली प्रगति ने भविष्य के लिए अनेक नए और जटिल प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

इन परिवर्तनों से एक ओर शोध, ज्ञान प्राप्त करने और कौशल सीखने की गति तथा सटीकता में वृद्धि हुई है, लेकिन दूसरी ओर ऑनलाइन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षा की ओर बढ़ने से मानवीय संबंध, शिक्षक और छात्र का निकट संबंध तथा नैतिक और आध्यात्मिक मूल्य कमजोर हो रहे हैं। इससे भविष्य के बारे में और अधिक चिंता भी पैदा होती है।

ग) इसके अतिरिक्त, दुनिया पर अत्याचार, शक्ति, धन और राजनीतिक छल पर आधारित वर्चस्व की एक व्यवस्था कायम है, जो विश्व की सांस्कृतिक और शैक्षिक व्यवस्थाओं को भी प्रभावित कर रही है। इस शक्ति ने दुनिया की संस्कृति और प्रशिक्षण व्यवस्था को भौतिकवादी सोच और अपने वर्चस्व के आधार पर चलाने की कोशिश की है तथा मानवीय, धार्मिक, न्यायपूर्ण और आध्यात्मिक मूल्यों को पीछे धकेल दिया है।

घ) इसके साथ ही विभिन्न वैज्ञानिक, तकनीकी और ज्ञान संबंधी परिवर्तनों ने आज के मानव और युवाओं के सामने नई सोच, नए प्रश्न और नई इच्छाएँ पैदा कर दी हैं। धार्मिक, आध्यात्मिक और ईश्वरीय विचारों को भी नई समस्याओं और चुनौतियों का सामना है। यह स्थिति एक ओर चिंता का कारण है, लेकिन यदि इसका सही तरीके से सामना किया जाए तो यही परिस्थितियाँ नए अवसरों और आशा का कारण भी बन सकती हैं।

ङ) ये शिक्षा और प्रशिक्षण के सामने मौजूद बड़ी समस्याओं की केवल कुछ मिसालें हैं। इन सभी समस्याओं और इनके जैसी दूसरी चुनौतियों ने दुनिया और हमारे देश में शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था को कमजोर किया है और भविष्य में भी कर सकती हैं। इसके बहुत हानिकारक परिणाम सामने आ सकते हैं और इसके विभिन्न तथा जटिल पहलू हैं। इसलिए इन समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर अध्ययन और बुनियादी कदम आवश्यक हैं।

2- इन परिस्थितियों का सही तरीके से सामना कैसे किया जाए?

ये समस्याएँ वर्तमान शिक्षा और प्रशिक्षण के बड़े संकटों का केवल एक हिस्सा हैं। इन परिस्थितियों ने हौज़ा, विश्वविद्यालय और स्कूलों की ज्ञान, संस्कृति और शिक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को भी कठिन परिस्थितियों में डाल दिया है।

यह बात ध्यान देने योग्य है कि राजनीतिक, सांस्कृतिक, ज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों का इन परिवर्तनों के प्रति अलग-अलग दृष्टिकोण है। कुछ लोग भौतिकवादी सोच और पश्चिमी जीवनशैली की इस परिवर्तनशील दिशा को सही मानते हैं और बिना गहराई से समझे इसके सामने समर्पण कर देते हैं।

कुछ लोग इन परिस्थितियों को सही ढंग से समझने में असमर्थ हैं, लेकिन फिर भी उनका मुकाबला करने की कोशिश करते हैं। हालांकि उनका मुकाबला सतही और बाहरी स्तर पर ही होता है।

सही रास्ता यह है कि इन परिवर्तनों का समझदारी और सक्रियता के साथ सामना किया जाए तथा इस्लामी और स्थानीय पहचान तथा शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए बुनियादी कदम उठाए जाएँ। लेकिन इस मार्ग के लिए बहुत मेहनत, तैयारी और गंभीर प्रयास की आवश्यकता है।

3- इस्लामी क्रांति और शिक्षा एवं प्रशिक्षण

इस्लामी क्रांति ने वर्तमान दुनिया के अंधकार में एक नई रोशनी पैदा की और ज्ञान, आध्यात्मिकता, न्याय तथा प्रगति की एक नई विचारधारा की नींव रखी।

इस्लामी क्रांति एक बड़े और विभिन्न पहलुओं वाले परिवर्तन का नाम है। इसका सबसे महत्वपूर्ण और गहरा पहलू ज्ञान और विचार से संबंधित है। इसलिए स्कूल, उसके बाद विश्वविद्यालय और हौज़ात-ए-इल्मिया को इस्लाम और इस्लामी क्रांति की इस ज्ञान और वैचारिक सोच का केंद्र होना चाहिए।

इस संबंध में परिवार और जनसंचार माध्यमों के साथ-साथ स्कूलों, शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों और सम्मानित शिक्षकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण और दीर्घकालिक है।

4- वर्तमान परिस्थितियों में प्रशिक्षण की आवश्यकता

भौतिकवादी सोच, अनियंत्रित इच्छाओं और वर्तमान पीढ़ी के सामने मौजूद विभिन्न खतरों के बीच प्रशिक्षण के विषय का समझदारी, जिम्मेदारी, उत्साह और सक्रिय एवं क्रांतिकारी दृष्टिकोण के साथ सामना करना आवश्यक है। इस संबंध में कुछ बातें विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं:

पहली बात: परिवार और सरकार की ओर से शिक्षा और प्रशिक्षण की निगरानी तथा मार्गदर्शन आज तकनीक के विकास, सामाजिक परिस्थितियों और भौतिकवादी तथा पश्चिमी संस्कृति के प्रभावों की चपेट में है। इस्लामी व्यवस्था और इस्लाम की शिक्षाओं के अनुसार इस निगरानी और मार्गदर्शन को सुरक्षित रखना आवश्यक है। समय की परिस्थितियों और परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए इसे फिर से मजबूत और बेहतर बनाया जाना चाहिए।

दूसरी बात: वर्तमान कठिन परिस्थितियों में युवा पीढ़ी को मजबूत बनाना, उनके ज्ञान और विचार की बुनियाद को सुदृढ़ करना तथा उनके संकल्प को मजबूत करना प्रशिक्षण की मूल आवश्यकता है। विभिन्न हमलों और नकारात्मक प्रभावों का मुकाबला मजबूत इरादे तथा धार्मिक और उच्च मूल्यों को जीवन में स्थान देने से ही संभव है। इसलिए सभी शैक्षणिक संस्थानों को नई पीढ़ी की विशेषताओं और आवश्यकताओं को सही ढंग से समझना चाहिए और उसी के अनुसार नए तरीके अपनाने चाहिए।

तीसरी बात: शिक्षा और प्रशिक्षण में परिवर्तन की योजना से उम्मीद थी कि इसके माध्यम से शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था को बेहतर और मजबूत बनाया जाएगा, लेकिन इस पर अमल के लिए कुछ अच्छे प्रयासों और उत्साह के बावजूद हमें अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं हो सकी। इसकी कुछ वजहें स्पष्ट हैं और कुछ को इस संक्षिप्त बातचीत में बयान नहीं किया जा सकता। अब इस योजना को व्यावहारिक रूप देने के साथ-साथ इसमें आवश्यक सुधार और पूर्णता भी लाई जानी चाहिए। इस संबंध में जिम्मेदार शिक्षकों का सामूहिक प्रयास, उनकी माँग और सहयोग बहुत प्रभावी साबित हो सकता है।

चौथी बात: स्कूल शिक्षा और प्रशिक्षण का मूल केंद्र और मुख्य आधार है। शिक्षक, प्रबंधक और प्रशिक्षण कार्यकर्ता नई पीढ़ी के मार्गदर्शक और निर्माता हैं। एक अच्छे और आदर्श स्कूल की स्थापना तथा शिक्षकों और प्रबंधकों के ज्ञान और समझ को बढ़ाने के लिए प्रयास करना सभी की जिम्मेदारी है।

इसके साथ-साथ शिक्षकों के ज्ञान, समझ और आर्थिक परिस्थितियों को बेहतर बनाने के अलावा समाज में उनके स्थान तथा शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान की प्रतिष्ठा और महत्व को बढ़ाना भी बहुत आवश्यक है। शिक्षकों और प्रशिक्षण कार्यकर्ताओं को वह स्थान और सम्मान मिलना चाहिए जिसके वे हकदार हैं, क्योंकि उनकी जिम्मेदारी बहुत बड़ी है।

पाँचवीं बात: संक्षेप में, युवा पीढ़ी, परिवार और शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान इस्लामी व्यवस्था के सभी संस्थानों, प्रशासनिक और कानून बनाने वाली संस्थाओं तथा पूरे समाज की पहली प्राथमिकता होने चाहिए। शिक्षा और प्रशिक्षण के विकास तथा सुधार के लिए जनता, सरकार, सरकारी संस्थाओं और सार्वजनिक संगठनों की सभी क्षमताओं और संसाधनों का उपयोग करना आवश्यक है।

अंत में, मैं इस बैठक के आयोजकों, प्रतिभागियों और सभी सम्मानित उपस्थित लोगों का धन्यवाद करता हूँ। मैं अल्लाह तआला से दुआ करता हूँ कि वह सभी प्रियजनों और इस शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण केंद्र को इस्लाम, इस्लामी क्रांति और देश की सेवा करने की तौफीक़ प्रदान करे।

मैं अपनी बात को ईश्वरीय पैग़म्बरों और अल्लाह के प्रिय बंदों, विशेष रूप से खातमुल औसिया हज़रत वली-ए-अस्र, हमारी जानें उन पर कुर्बान हों, इस्लाम और इस्लामी क्रांति के महान शहीदों, विशेष रूप से इमाम खुमैनी और शहीद नेता को सलाम और श्रद्धांजलि प्रस्तुत करते हुए समाप्त करता हूँ।

मैं अल्लाह तआला के सामने विनम्रतापूर्वक दुआ करता हूँ कि वह इस्लाम और मुसलमानों, ईरान की महान जनता, सशस्त्र बलों और प्रतिरोध धुरी को सफलता प्रदान करे।

और हमारी अंतिम दुआ यह है कि सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो सारे संसारों का पालनहार है।

अली रज़ा आराफ़ी

हौज़ा इल्मिया ईरान के प्रमुख

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