सोमवार 17 अगस्त 2026 - 00:45
कारगिल में "सदाए ज़ैनब" के शीर्षक से वैज्ञानिक और साहित्यिक सभा का आयोजन: हज़रत ज़ैनब कुबरा की पवित्र जीवनी, धैर्य, साहस और पैगाम-ए-कर्बला को श्रद्धांजलि

बाक़िर उल-उलूम अनुसंधान एवं शैक्षणिक संस्थान, कारगिल के तत्वावधान में "सदाए ज़ैनब" के शीर्षक से एक वैज्ञानिक और साहित्यिक सभा का आयोजन किया गया। इसमें हज़रत ज़ैनब कुबरा सलामुल्लाह अलैहा के बेमिसाल ज्ञान, विचार और आध्यात्मिक व्यक्तित्व, उनके महान बलिदानों, धैर्य, दृढ़ता, साहस और पैगाम-ए-कर्बला के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, बाक़िर उल-उलूम अनुसंधान एवं शैक्षणिक संस्थान, कारगिल के तत्वावधान में "सदाए ज़ैनब" के शीर्षक से एक वैज्ञानिक और साहित्यिक सभा का आयोजन किया गया। इसमें हज़रत ज़ैनब कुबरा सलामुल्लाह अलैहा के बेमिसाल ज्ञान, विचार और आध्यात्मिक व्यक्तित्व, उनके महान बलिदानों, धैर्य, दृढ़ता, साहस और पैगाम-ए-कर्बला के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

सभा में उलमा, बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों, कवियों, छात्रों और अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम के चाहने वालों ने भाग लिया। उन्होंने लेखों, कविताओं और मनक़बत के माध्यम से अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम और सैयदा फातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की बेटी हज़रत ज़ैनब कुबरा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में तरही मुशायरा भी आयोजित किया गया, जिसका मिसरा "अली की बेटी शाम के दरबार की विजेता है" था। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से कर्बला की घटना के बाद हज़रत ज़ैनब के ऐतिहासिक किरदार, उनके बेमिसाल साहस, भाषण-कला और दृढ़ता को उजागर किया।

कारगिल में "सदाए ज़ैनब" के शीर्षक से वैज्ञानिक और साहित्यिक सभा का आयोजन: हज़रत ज़ैनब कुबरा की पवित्र जीवनी, धैर्य, साहस और पैगाम-ए-कर्बला को श्रद्धांजलि

तरही मुशायरे में अली असग़र रंचन, ग़ुलाम रज़ा बलती, अशरफ़ अली सागर, रज़ा अमजद बदगामी और यासीन अंसारी ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

वैज्ञानिक सभा में तक़ी ख़ान नायाब, सैयद हादी शाह, प्रोफेसर नासिर शाबानी और इंजीनियर हाजी हुसैन ने लेख प्रस्तुत किए और हज़रत ज़ैनब की पवित्र जीवनी के विभिन्न ज्ञानवर्धक, ऐतिहासिक, वैचारिक और आध्यात्मिक पहलुओं पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ताहिर हुसैन ज़बदावी ने अपने संबोधन में हज़रत ज़ैनब कुबरा की पवित्र जीवनी, कठिनाइयों, बलिदानों और महान दृढ़ता को उजागर करते हुए कहा कि कर्बला की घटना के बाद हज़रत ज़ैनब ने जिस साहस, दूरदर्शिता और स्पष्ट वक्तृत्व के साथ पैगाम-ए-आशूरा को आगे बढ़ाया, वह इस्लाम के इतिहास का एक उज्ज्वल और कभी न भुलाया जाने वाला अध्याय है।

उन्होंने कहा कि हज़रत ज़ैनब का जीवन आज के दौर में भी हमारे लिए धैर्य, ईमान, सत्य बोलने, सम्मान और गरिमा, साहस तथा अत्याचार के खिलाफ दृढ़ता का पाठ है। विशेष रूप से युवा पीढ़ी और महिलाएं हज़रत ज़ैनब की जीवनी से बहुत मार्गदर्शन प्राप्त कर सकती हैं।

ताहिर हुसैन ज़बदावी ने बाक़िर उल-उलूम अनुसंधान एवं शैक्षणिक संस्थान की ओर से इस तरह की वैज्ञानिक और वैचारिक सभाओं के आयोजन की सराहना की। उन्होंने इस्लामी अनुसंधान और अध्ययन के क्षेत्र में डॉ. शेख़ हसनियान मुफस्सिरी की सकारात्मक और रचनात्मक सेवाओं की भी प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सोशल मीडिया के दौर में इस तरह के वैज्ञानिक सेमिनार और सम्मेलन बहुत महत्वपूर्ण हैं, ताकि युवा पीढ़ी तक प्रमाणिक इस्लामी शिक्षाओं, इतिहास-ए-अहलेबैत और पैगाम-ए-कर्बला को प्रभावी और वैज्ञानिक तरीके से पहुंचाया जा सके।

कारगिल में "सदाए ज़ैनब" के शीर्षक से वैज्ञानिक और साहित्यिक सभा का आयोजन: हज़रत ज़ैनब कुबरा की पवित्र जीवनी, धैर्य, साहस और पैगाम-ए-कर्बला को श्रद्धांजलि

प्रसिद्ध इतिहासकार और बुद्धिजीवी मास्टर सादिक़ हरदासी ने कार्यक्रम का संचालन बहुत सुंदर, प्रभावी और वैज्ञानिक तरीके से किया तथा विभिन्न सत्रों को ऐतिहासिक और वैचारिक संदर्भ में एक-दूसरे से जोड़ा।

इस अवसर पर पिछले महीने आयोजित पहली कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किए गए लेखों पर आधारित पुस्तक "हकीम-ए-उम्मत" का भी विमोचन किया गया। यह कॉन्फ्रेंस शहीद रहबर-ए-मुअज़्ज़म सैयद अली ख़ामेनई के संबंध में आयोजित की गई थी।

कार्यक्रम में युवाओं में अध्ययन की रुचि को बढ़ावा देने के लिए आयोजित पुस्तक-पठन प्रतियोगिता के परिणामों की भी घोषणा की गई।

प्रतियोगिता में कुल 69 युवाओं ने भाग लिया, जबकि बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले 9 छात्रों को पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

अंत में हाजी इनायतुल्लाह राहि ने धन्यवाद भाषण प्रस्तुत किया और मुख्य अतिथि, उलमा, कवियों, बुद्धिजीवियों, छात्रों, प्रतिभागियों तथा कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।

सभा के अंत में इस संकल्प का इज़हार किया गया कि मक्तब-ए-अहलेबैत, पैगाम-ए-आशूरा और हज़रत ज़ैनब कुबरा की जीवनी को वैज्ञानिक एवं अनुसंधानात्मक तरीके से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सिलसिला जारी रखा जाएगा, क्योंकि कर्बला के बाद पैगाम-ए-हुसैन को जीवित रखने में हज़रत ज़ैनब की भूमिका मानव इतिहास के लिए सत्य, सच्चाई और अत्याचार के खिलाफ प्रतिरोध की अमर मिसाल है।

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