लेखक: मौलाना मिकदाद अली अलवी
हौज़ा न्यूज़ एजेंसी I एक शानदार इंट्रोडक्शन हज़रत ज़ैनब कुबरा (स) सब्र की पूरी तस्वीर हैं जिन पर रज़ा की रोशनी हमेशा चमकती रही। वह संतोष की जीती-जागती कहानी हैं जिस पर सब्र की रोशनी चमक रही है। इतिहास की सफ़ेद चादर पर, आपकी शख्सियत सब्र और हिम्मत के वो अक्षर हैं जो समय की भारी बारिश में भी नहीं मिटते।
इस्मत का पालना: आसमानी परवरिश का एक शाहकार
ऐतिहासिक रिवायतो के अनुसार, उनका जन्म 5 जमादि अल अव्वल 5 हिजरी को सैय्यदतुल निसाइल आलमीन हज़रत फातिमा ज़हरा (स) की गोद में हुआ था, जो मौला अली (अ) के लिए एक रहमत और ज़ीनत थीं, और वह इस्मत और पवित्रता की गोद में चमकीं।
उनकी परवरिश उस पवित्र जगह पर हुई जहाँ वही नाज़िल होती थी, जहाँ पवित्रता की ऊँची दीवारें थीं, और ईश्वरीय ज्ञान के दीये हमेशा जलते रहते थे। रसूल (स) की दयालु आँखों ने उनके अंदर सब्र के बीज बोए। हज़रत फातिमा (स) की पवित्र गोद ने उनके दिल में रज़ा का पौधा उगाया। हज़रत अली (अ) के ज्ञान के असीम सागर ने उनकी सोच को गहराई दी। इसी परवरिश ने उन्हें "बनी हाशिम की अकीला" बनाया, पैगंबर के परिवार की वह चमकदार पर्सनैलिटी जो समझदारी और बलाग़त में एकता की निशानी बन गई।
इल्मी शख्सियत: ख़ानदाने वही की वारिस और इल्म व हिकमत
हज़रत ज़ैनब (स) न सिर्फ़ सब्र और रज़ा की मिसाल थीं, बल्कि इल्म और हिकमत के उस खजाने की अमीन भी थीं जो पैगंबर के परिवार की विरासत थी। उन्हें कुरानिक साइंस, व्याख्या, हदीस, फ़िक़्ह और कलाम में इतनी महारत हासिल थी कि अपने समय में महिलाओं के लिए यह एक दुर्लभ मिसाल थी। उनकी ज्ञान की समझ का अंदाज़ा कूफ़ा और सीरिया के दरबारों में दिए गए उनके उपदेशों और बयानों से लगाया जा सकता है, जिसमें उन्होंने न सिर्फ़ कुरानिक आयतों की गहरी व्याख्या पेश की, बल्कि धार्मिक तर्क से सही और गलत के बीच का अंतर भी साफ़ किया। उनके न्यायशास्त्र और तर्क की ताकत ने यज़ीदी दरबार के तथाकथित विद्वानों को भी हैरान कर दिया।
बलाग़ और खिताबत: ज़बाने हक़ की तरजुमान
हज़रत ज़ैनब (स) की बलाग़त उनकी विद्वत्तापूर्ण पर्सनैलिटी का एक चमकता हुआ पहलू थी। उनके उपदेश न सिर्फ़ भावनाओं में बहते थे, बल्कि लॉजिक, असलियत और हिकमत के पहलुओं से भी भरपूर थे। अपने उपदेशों में, उन्होंने कुरान के विषयों, पैगंबर की शिक्षाओं और अलवी ज्ञान को इस तरह से कवर किया कि हर शब्द सच्चाई का आईना बन गया। सीरिया के दरबार में उनके उपदेश को इस्लाम के इतिहास में बलाग़त और हिम्मत का एक बेहतरीन नमूना माना जाता है, जहाँ उन्होंने कुरान की आयतों की रोशनी में ज़ुल्म और अत्याचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई। उनकी भाषा ज्ञान से भरी, तर्कों से लैस और ईमान की गर्मी से भरी थी।
सब्र की मिसाल, रज़ा का आईना
पैगंबर (स) का सब्र कोई मजबूरी नहीं थी, बल्कि अल्लाह की ताकत पर पूरे भरोसे की आवाज़ थी। उनका संतोष बेपरवाही से हार मानना नहीं था, बल्कि अल्लाह की मर्ज़ी के आगे झुकने का दिल को छू लेने वाला मेल था। जब ज़िंदगी ने मुश्किल इम्तिहान दिए, तो उनके वजूद से सब्र और संतोष का वह नायाब रत्न निकला, जिसकी रोशनी ने आज तक उस ज़माने को रोशन किया है।
कर्बला: सब्र और रज़ा का एक शानदार मंज़र
आशूरा की उस खूनी शाम को, जब कर्बला के मैदान में शहादत के फूल खिले, हज़रत ज़ैनब (स) ने सब्र का वह बेहिसाब समंदर दिखाया जिसमें दुख का तूफ़ान भी गायब हो गया। अपने भाई के पार्थिव शरीर पर उनकी आँखों में आँसू नहीं थे, बल्कि रज़ा की रोशनी के दीये थे, जो यह पैगाम दे रहे थे:
"अल्लाह के लिए वह है जो उसने लिया है, और उसी के लिए वह है जो उसने दिया है। सब कुछ एक तय समय के लिए उसी के पास है। हम सब्र रखते हैं।"
तंबुओं के रक्षक, अनाथों की पनाह, कैदियों के मार्गदर्शक, आपने हर पल सब्र और रज़़ा की एक जीती-जागती मिसाल पेश की जिसने इतिहास का रुख बदल दिया।
ज़ुल्म के दरबार में सच की आवाज़
जब आपने कूफ़ा के ग़दर बाज़ार में और सीरिया के ज़ुल्म के दरबार में सच का नारा लगाया, तो यह सब्र के बाद की ताकत थी जो रज़ा की रोशनी से भर गई थी। आपके हर शब्द में सब्र की गहराई थी, हर वाक्य में संतोष की ऊँचाई थी। यज़ीद के दरबार में, आपके शब्द गरज की तरह गूंजे:
जो हुआ वह हमारे लिए सम्मान है, तुम्हारे लिए अपमान। यह ज़ुल्म हमारी इज़्ज़त है, तुम्हारी बेइज़्ज़ती।
ये सिर्फ़ शब्द नहीं थे, ये सब्र के रेगिस्तान से उठने वाली रज़ा की बारिश थी, जिसने झूठ के किलों को बहा दिया।
आईना सब्र व रज़ा: हमेशा रहने वाला सबक
हज़रत ज़ैनब (स) की ज़िंदगी से इंसानियत को यह रोशन संदेश मिलता है:
सब्र कोई हथियार नहीं है, यह ताकत है। यह कमज़ोरी नहीं है, यह हिकमत है।
रज़ा हार नहीं है, यह जीत है। यह हार नहीं है, यह ऊपर उठना है।
आप (स) ने सिखाया कि:
सब्र दिल की वह मज़बूती है जो तूफ़ानों में भी नहीं टूटती।
संतुष्टि रूह की वह तरक्की है जो मुश्किलों में भी झुकती नहीं।
सब्र और संतोष का मेल वह केमिस्ट्री है जो ज़िंदगी की कड़वाहट को भी शहद में बदल देती है।
सब्र और रज़ा के यूनिवर्सल सबक
इतिहास के आईने में, हज़रत ज़ैनब कुबरा (स) की जीवनी वह ट्रांसपेरेंट सतह है जिसमें सब्र और रज़ा की पूरी तस्वीर दिखती है। उन्होंने साबित किया कि:
सब्र खुदा के फ़ैसले पर पूरे भरोसे का नाम है।
संतुष्टि इस भरोसे के आगे सरेंडर करने का नाम है।
आज के मुश्किल समय में, जब इंसानियत सब्र की ताकत खो चुकी है और रज़ा के मतलब से अनजान है, ज़ैनब की जीवनी हमें याद दिलाती है कि:
हर मुश्किल में सब्र का पालना छिपा होता है, और हर सब्र के बाद जन्नत का बगीचा बनता है।
निष्कर्ष: रास्ते की हमेशा जलने वाली मशाल
हज़रत ज़ैनब की मुबारक ज़िंदगी का हर पल इस बात का ऐलान है कि सब्र और रज़ा के बिना इंसान जीतने वाला नहीं, बल्कि सिर्फ़ एक राहगीर है। आपकी बायोग्राफी वह आईना है।
जिसमें देखकर हर ज़माने का इंसान अपने अंदर सब्र की ताकत और सुकून की रोशनी पैदा कर सकता है।
हुसैनी के डिफेंस मिशन की शहादत
एक मशहूर कहावत के मुताबिक, ज़ैनब कुबरा (स) 15 रजब 62 हिजरी को सच्चाई का रास्ता बताते हुए दुनिया को अलविदा कहती हैं, लेकिन उनका सब्र और सुकून का पैगाम हमेशा ज़िंदा रहेगा।
उनकी ज़िंदगी का हर पन्ना हमें पुकारता है:
सब्र रखो और तुम्हें सुकून मिलेगा, अगर तुम सुकून का दामन थामे रहोगे, तो तुम खुदा के लिए कुर्बान हो जाओगे, और अगर तुम खुदा के लिए कुर्बान हो जाओगे, तो इतिहास तुम्हारे कदम चूमेगा।
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