हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार,निम्नलिखित रिवायत "मीज़ानुल हिकमत" किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार है:
قال الامام الکاظم علیه السلام:
إِذَا وَعَدْتُمُ الصِّغَارَ فَأَوْفُوا لَهُمْ؛ فَإِنَّهُمْ یَرَوْنَ أَنَّکُمُ الَّذِینَ تَرْزُقُونَهُمْ، وَإِنَّ اللَّهَ لَا یَغْضَبُ بِشَیْءٍ کَغَضَبِهِ لِلنِّسَاءِ وَالصِّبْیَانِ.
इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया:
"जब तुम छोटे बच्चों से कोई वादा करो तो उसे पूरा करो, क्योंकि वे यही समझते हैं कि तुम ही उन्हें रोज़ी देते हो। और अल्लाह तआला किसी बात पर उतना क्रोधित नहीं होता, जितना महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के मामले में क्रोधित होता है।"
मीज़ानुल हिकमत, भाग 13, पेज 252
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