हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,इस्फ़हान प्रांत में इमाम ए जुमआ हुज्जतुल-इस्लाम मुहम्मद हुसैन हल्लाजी मुफ़रद ने कहा कि मस्जिद समाज की समस्याओं के समाधान का केंद्र होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि हमारे समाज की लगभग 80 प्रतिशत समस्याओं का समाधान मस्जिद के माध्यम से किया जा सकता है।
काशान में क्षेत्र के इमाम जमाअतों की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने मस्जिदों के मामलों के लिए प्रांतीय और क्षेत्रीय कार्य-व्यवस्थाओं के गठन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि काशान क्षेत्र में लगभग 800 मस्जिदों की पहचान कर उन्हें संबंधित प्रणाली में पंजीकृत किया गया है। इनमें लगभग 500 मस्जिदें काशान, 150 आरान व बीदगोल और 150 नतंज़ में हैं।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र मस्जिदों के महत्वपूर्ण क्षमताएँ रखता है। मस्जिदों में इमाम जमाअत, प्रबंधन समितियों, बेसिज कमांडरों, सांस्कृतिक केंद्रों और अन्य सक्रिय संस्थाओं को व्यवस्थित करने के लिए भी अच्छे कदम उठाए गए हैं।
इस्फ़हान प्रांत की जुमे के इमामों की नीति-निर्धारण परिषद के प्रमुख ने दोहराया कि मस्जिद को समाज की समस्याओं के समाधान का मुख्य केंद्र बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, समाज की लगभग 80 प्रतिशत समस्याओं का समाधान मस्जिद में संभव है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भी कई बार इस बात पर ज़ोर दे चुके हैं कि समस्याओं का समाधान केवल सरकारी अधिकारियों के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इस प्रक्रिया में जनता और मस्जिदों को केंद्रीय भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। तीन वर्षों के विशेषज्ञ अध्ययन के बाद मस्जिद से संबंधित दस्तावेज़ को मंजूरी दी गई है और अब प्रांतों में मस्जिदों की क्षमताओं को व्यवस्थित करने के लिए एक संगठित नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा,हम मस्जिद के मामले में 40 साल पीछे रह गए हैं।उन्होंने ज़िलाधिकारी और विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों से मस्जिदों से संबंधित कार्यों में सहयोग करने का आग्रह किया।
अंत में उन्होंने कहा कि अभी बहुत काम करना बाकी है और हमें कदम-दर-कदम क्षेत्र की मस्जिदों को एक आदर्श और सक्रिय मस्जिद के स्तर तक पहुँचाना होगा।
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