शुक्रवार 4 सितंबर 2026 - 22:57
आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में हौज़ा-ए-इल्मिया की बुनियादी रणनीति / आर्टिफ़ीशियल इंटेलीजेंस (AI) के साथ इस्लामी उलूम के ढांचे की समीक्षा पर जोर

आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी ने कहा कि हौज़ा-ए-इल्मिया को संज्ञानात्मक विज्ञान, आधुनिक तकनीकों और आर्टिफ़ीशियल इंटेलीजेंस (AI) का सामना करते हुए न तो उत्साह में आकर जल्दबाजी और सतही तरीके से इनका इस्तेमाल करना चाहिए और न ही लापरवाही, उपेक्षा और इन बदलावों को नकारने का रवैया अपनाना चाहिए। बल्कि बुद्धिमत्ता, गहराई, इज्तिहादी बसीरत और इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित दृष्टिकोण के साथ इन बदलावों को समझने, उनका आलोचनात्मक अध्ययन करने और उनसे लाभ उठाने की जरूरत है। हमें आर्टिफ़ीशियल इंटेलीजेंस (AI) को ध्यान में रखते हुए इस्लामी विज्ञान के पूरे ढांचे पर नए सिरे से विचार करना चाहिए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी ने क़ुम स्थित आलुलबैत (अ) अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित धार्मिक अध्ययनों में आर्टिफ़ीशियल इंटेलीजेंस (AI) के इस्तेमाल के विषय पर संस्थान-ए-इल्म, सभ्यता व इरफ़ान की ओर से इस्लामी विज्ञान के तकनीकी उत्पादों के अनावरण समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने इमाम शहीद और प्रतिरोध की धुरी के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने कहा, हम इमाम शहीद (रह.) की पवित्र आत्मा और प्रतिरोध की धुरी के शहीदों की आत्माओं पर सलाम भेजते हैं और वर्तमान महान संघर्ष में इस्लाम और मुसलमानों की सहायता के लिए अल्लाह तआला से दुआ करते हैं। यह इस्लाम और कुफ्र तथा उत्पीड़ितों और साम्राज्यवादियों के बीच एक महान सभ्यतागत संघर्ष है।

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने समारोह में शामिल उलमा, शिक्षकों, विद्वानों, छात्रों, विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों तथा हौज़ा और विश्वविद्यालय से जुड़े सक्रिय लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि मैं उन सभी व्यक्तियों और संस्थाओं का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं, जिन्होंने पिछले कई दशकों के दौरान हौज़ा-ए-इल्मिया को दुनिया में होने वाले तकनीकी और वैज्ञानिक बदलावों से परिचित कराने तथा उनके करीब लाने के लिए प्रयास किए हैं।

आयतुल्लाह आराफ़ी ने संस्थान-ए-इल्म, सभ्यता व इरफ़ान के आयोजकों का विशेष रूप से धन्यवाद करते हुए कहा कि मैं उन छात्रों, विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, प्रतिभाशाली युवाओं और हौज़ा एवं विश्वविद्यालय से जुड़े उन साथियों का भी शुक्रिया अदा करता हूं, जो इस क्षेत्र और इस संस्थान से जुड़कर युवा, विचारशील, उत्साही और सक्रिय समूह के रूप में काम कर रहे हैं। हम इस्लामी विज्ञान की सीमाओं को विस्तृत करने और ज्ञान-विज्ञान, इस्लामी विज्ञान, संज्ञानात्मक विज्ञान में होने वाले बदलावों तथा आधुनिक तकनीकों के बीच साझा क्षेत्रों और आपसी संबंधों को स्पष्ट करने के लिए इन प्रिय साथियों के उत्साह, रुचि और समर्पण के आभारी हैं।

आयतुल्लाह आराफ़ी ने शहीद रहबर (र) द्वारा ज्ञान और तकनीक पर विशेष ध्यान दिए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि वैज्ञानिक और तकनीकी शक्ति हमारे शहीद रहबर (र) के सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक थी। सभी ने उनके भाषणों और विभिन्न अवसरों पर हुई मुलाकातों में इस विषय को देखा और करीब से महसूस किया कि वे ज्ञान और तकनीक से जुड़े मुद्दों को कितनी अहमियत देते थे और उनका लगातार अनुसरण करते थे। शहीद रहबर (र) देश में ज्ञान और तकनीक की स्थिति तथा उसकी चरणबद्ध प्रगति की बारीकियों पर भी नजर रखते थे।

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने आगे कहा कि मुझे विश्वास है कि देश में वैज्ञानिक और शैक्षिक विकास तथा उच्च तकनीकों के क्षेत्र में हुई कई प्रगति उनके विशेष ध्यान के बिना संभव नहीं होती या कम से कम आज जिस रूप में दिखाई देती है, उस रूप में नहीं होती। ज्ञान और तकनीक पर दिया गया यह ध्यान और प्रयास आगे भी जारी रहना चाहिए।

आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में हौज़ा-ए-इल्मिया की बुनियादी रणनीति / आर्टिफ़ीशियल इंटेलीजेंस (AI) के साथ इस्लामी उलूम के ढांचे की समीक्षा पर जोर

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