सोमवार 21 सितंबर 2026 - 16:24
हौज़ा-ए-इल्मिया इमाम हादी उड़ी, जम्मू-कश्मीर की ओर से आयतुल्लाह शुबैरी ज़ंजानी के निधन पर शोक संवेदना

जम्मू-कश्मीर के उड़ी स्थित हौज़ा-ए-इल्मिया इमाम हादी, नूरख्वाह के निदेशक ने आयतुल्लाह अलउज़्मा शुबैरी ज़ंजानी के दुखद निधन पर गहरा दुख और शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आयतुल्लाह ज़ंजानी ने अपने ज्ञान की रोशनी से विद्वानों के बौद्धिक और शैक्षिक जीवन को प्रकाशित किया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन सैयद दस्त अली नकवी के शोक संदेश का पाठ इस प्रकार है।

इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन

हौज़ा-ए-इल्मिया के एक महान विद्वान और आध्यात्मिक स्तंभ, महान फकीह, शोधकर्ता तथा ज्ञान और गुणों से संपन्न व्यक्तित्व आयतुल्लाह अलउज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी रहमतुल्लाह अलैह के दुखद निधन पर हम अपने दिली दुख और शोक का इज़हार करते हैं।

आप हमारे लिए केवल एक महान धर्मगुरु ही नहीं, बल्कि एक स्नेही शिक्षक, समर्पित मार्गदर्शक, दयालु रहबर और ज्ञान के क्षेत्र में उपकार करने वाले व्यक्तित्व भी थे। आपकी विद्वतापूर्ण बैठकों से लाभ उठाना, आपकी स्नेह और प्रेम भरी छत्रछाया तथा आपकी नसीहतें हमारे लिए एक अनमोल पूंजी हैं।

एक शिक्षक से बिछड़ने का दुख शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। जिस व्यक्तित्व ने अपने ज्ञान की रोशनी से हमारे बौद्धिक और शैक्षिक जीवन को प्रकाशित किया हो, जिसकी कृपा ने विद्यार्थियों के हौसले को मजबूत किया हो और जिसके मार्गदर्शन ने ज्ञान और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की समझ प्रदान की हो, उसका निधन निश्चित रूप से एक ऐसी अपूरणीय कमी है जिसे पूरा करना संभव नहीं।

आपका जीवन हमारे लिए ज्ञान, तकवा, विनम्रता, निष्ठा और धर्म की सेवा का व्यावहारिक उदाहरण था। आपने अपना पूरा जीवन अहले-बैत अलैहिमुस्सलाम के ज्ञान की शिक्षा और उसके प्रचार-प्रसार तथा विद्यार्थियों के प्रशिक्षण के लिए समर्पित कर दिया। आपके शिष्य और आपसे जुड़े हुए विद्वान हमेशा आपकी वैज्ञानिक और विद्वतापूर्ण विरासत को अपने लिए गर्व का विषय समझेंगे।

अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम फरमाते हैं: «इन्नमल आलिमु मन अमिला बिमा अलिम» यानी वास्तविक विद्वान वही है जो अपने ज्ञान पर अमल करे।

निस्संदेह, एक आलिम-ए-रब्बानी का निधन केवल एक व्यक्ति से बिछड़ना नहीं होता, बल्कि यह एक विद्वतापूर्ण युग के अंत और एक बड़े शैक्षिक एवं प्रशिक्षण संबंधी खालीपन का कारण बनता है।

हम हज़रत वली-ए-अस्र अज्जलल्लाहु तआला फरजहुश्शरीफ, मराजे-ए-इज़ाम, हौज़ात-ए-इल्मिया, शिक्षकों और विद्यार्थियों, विद्वानों और फुज़ला, शिष्यों, परिजनों तथा सभी मोमिन पुरुषों और महिलाओं की सेवा में अपनी हार्दिक संवेदना और ताज़ियत पेश करते हैं।

बारगाह-ए-खुदावंद-ए-मुतआल में दुआ है कि मरहूम स्नेही शिक्षक आयतुल्लाह अलउज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी रहमतुल्लाह अलैह को हज़रत मुहम्मद और आले-मुहम्मद के पड़ोस में उच्च स्थान प्रदान करे, उनकी सभी शैक्षिक और धार्मिक सेवाओं को स्वीकार करे, उनके दर्जे को बुलंद करे और उनके सभी शिष्यों, परिजनों तथा शोकाकुल लोगों को धैर्य और भरपूर प्रतिफल प्रदान करे।

आदरणीय शिक्षक! आप शारीरिक रूप से हमसे बिछड़ गए हैं, लेकिन आपकी विद्वतापूर्ण यादें, आपकी नसीहतें, आपका स्नेह और आपका प्रशिक्षण हमारे दिलों में हमेशा जीवित रहेगा।

आपकी जुदाई हमारे लिए ऐसी कमी है जिसे समय भी पूरा नहीं कर सकता।

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