शनिवार 26 सितंबर 2026 - 15:20
आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी के निधन पर शिया उलमा असेंबली हिंद का शोक संदेश

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी के निधन पर शिया उलमा असेंबली हिंद ने शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि उनका शैक्षिक जीवन इज्तिहाद और इस्तنبात, दरसे-खारिज, फिकह और उसूल के बुनियादी सिद्धांतों की समीक्षा, धार्मिक ग्रंथों की जांच, सनदों की समीक्षा, इल्म-ए-रिजाल और दिरायतुल-हदीस, विभिन्न विद्वानों के कथनों के अध्ययन तथा फुज़ला के प्रशिक्षण से भरा हुआ था।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी के निधन पर शिया उलमा असेंबली हिंद ने शोक संदेश जारी किया है, जिसका पाठ इस प्रकार है:

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन

आलिम-ए-रब्बानी, फकीह-ए-अहले-बैत अलैहिमुस्सलाम, उसूली शोधकर्ता, प्रख्यात मुहद्दिस, सूक्ष्मदर्शी रिजाली विद्वान, हौज़ा इल्मिया क़ुम के प्रमुख सदस्य और महान मरजा-ए-तकलीद हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी के दुखद निधन की खबर से पूरे शिया जगत, विशेष रूप से हौज़ा इल्मिया और फिकह तथा शोध से जुड़े लोगों को गहरा दुख और सदमा पहुंचा है।

उनका शैक्षिक जीवन इज्तिहाद और इस्तिंबात, दरसे-खारिज, फिकह और उसूल के बुनियादी सिद्धांतों की समीक्षा, धार्मिक ग्रंथों की जांच, सनदों की समीक्षा, इल्म-ए-रिजाल और दिरायतुल-हदीस, विभिन्न कथनों के अध्ययन तथा फुज़ला के प्रशिक्षण से भरा हुआ था। फिकही विषयों में सूक्ष्म दृष्टि, तर्क की गहराई, शोध की मौलिकता और वैज्ञानिक सावधानी, जबकि रिजाल और हदीस में सनदों की समीक्षा, रावियों के वर्गों की जानकारी, हदीस के मूल पाठ और स्रोतों का तुलनात्मक अध्ययन तथा हदीस से संबंधित प्रमाणों से सहायता लेना उनके शैक्षिक तरीके की प्रमुख विशेषताएं थीं।

उनकी शख्सियत में ज्ञान और तक़वा, फिकाहत और परहेज़गारी, शोध और विनम्रता, दूरदृष्टि और संतुलन का सुंदर समन्वय था। उन्होंने अपने पाठों, शोध कार्यों और शिष्यों के माध्यम से फिकाहत और इज्तिहाद की एक शैक्षिक परंपरा को मजबूती प्रदान की, जिसके प्रभाव लंबे समय तक बने रहेंगे।

ऐसे शोधकर्ता फकीह, दूरदर्शी रिजाली विद्वान और फुज़ला के प्रशिक्षक का निधन केवल एक विद्वान की मृत्यु नहीं, बल्कि समकालीन हौज़ा की शैक्षिक विरासत के लिए एक बड़ा नुकसान है।

शिया उलमा असेंबली हिंद हज़रत वली-ए-अस्र इमाम महदी अज्जलल्लाहु तआला फरजहुश्शरीफ, वली-ए-फकीह, मराजे-ए-एजाम-ए-तकलीद, हौज़ा इल्मिया, शिक्षकों और फुज़ला, शिष्यों और श्रद्धालुओं तथा विशेष रूप से शोकाकुल परिवार के प्रति दिल की गहराइयों से संवेदना और शोक व्यक्त करती है।

शिया उलमा असेंबली हिंद

22 सितंबर 2026

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