रविवार 4 अक्टूबर 2026 - 19:17
बरकत केवल धन की अधिकता नहीं, बल्कि सीमित संसाधनों के अधिक और दीर्घकालिक प्रभाव का नाम है।हुज्जतुल इस्लाम डॉ. रफ़ीई

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन डॉ. रफ़ीई ने बरकत के अर्थ को स्पष्ट करते हुए तक़वा, न्याय, अच्छे कर्म, रिश्तेदारों से अच्छे संबंध, दान, माता-पिता के साथ नेकी और अच्छे व्यवहार को जीवन में बरकत के महत्वपूर्ण कारण बताया। उन्होंने विश्वासघात, झूठ, चोरी और बदज़बानी को बरकत खत्म होने का कारण बताया हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन डॉ. रफ़ीई ने बरकत के अर्थ को स्पष्ट करते हुए तक़वा, न्याय, अच्छे कर्म, रिश्तेदारों से अच्छे संबंध, दान, माता-पिता के साथ नेकी और अच्छे व्यवहार को जीवन में बरकत के महत्वपूर्ण कारण बताया। उन्होंने विश्वासघात, झूठ, चोरी और बदज़बानी को बरकत खत्म होने का कारण बताया है।

हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन डॉ. रफ़ीई ने टेलीविजन कार्यक्रम ‘सम्त-ए-ख़ुदा’ में बातचीत करते हुए कहा कि बरकत केवल धन, उम्र या संसाधनों की अधिकता का नाम नहीं है, बल्कि बरकत यह है कि कोई चीज़ सीमित होने के बावजूद उसके प्रभाव और परिणाम अधिक और लंबे समय तक रहने वाले हों। बरकत का वास्तविक स्रोत अल्लाह तआला है। क़ुरआन और रिवायतों में कुछ व्यक्तियों, स्थानों, समय और कर्मों को बरकत वाला बताया गया है।

उन्होंने शबे-क़द्र का उदाहरण देते हुए कहा कि यह रात समय की दृष्टि से छोटी है, लेकिन इसकी क़द्र एक हज़ार महीनों से अधिक है। इसी तरह मस्जिदुल हराम का स्थान सीमित है, लेकिन वहां एक नमाज़ का सवाब बहुत अधिक है। इससे पता चलता है कि बरकत का संबंध केवल अधिकता से नहीं, बल्कि प्रभाव और परिणाम देने की क्षमता से है।

डॉ. रफ़ीई ने तक़वा को समाज में बरकत का सबसे महत्वपूर्ण कारण बताते हुए क़ुरआन की आयत
«وَلَوْ أَنَّ أَهْلَ الْقُرَىٰ آمَنُوا وَاتَّقَوْا لَفَتَحْنَا عَلَيْهِمْ بَرَكَاتٍ مِنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ»
की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि गुनाह, अत्याचार और दूसरों के अधिकारों का उल्लंघन करने से बचना अल्लाह की बरकतों के नाज़िल होने का माध्यम है। उन्होंने न्यायप्रिय और धर्मपरायण शासक, सामाजिक न्याय तथा अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ.स.) की सीरत को भी इस संबंध में महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने अच्छे कर्म और किसी काम को सही तथा मजबूत तरीके से पूरा करने को उम्र में बरकत का कारण बताया। इसके अलावा रिश्तेदारों से अच्छे संबंध, दान-सदक़ा, माता-पिता के साथ नेकी, परिवार के सदस्यों के साथ अच्छा व्यवहार और पड़ोसियों के अधिकारों का ध्यान रखना भी जीवन में बरकत के कारणों में शामिल बताया। उनके अनुसार ख़ुम्स और ज़कात तथा अपनी पसंदीदा चीज़ों में से दान करना धन को कम नहीं करता, बल्कि उसमें बरकत पैदा करता है।

उन्होंने घर में सलाम करने, मेहमाननवाज़ी, ज़रूरतमंदों को खाना खिलाने और परिवार पर ध्यान देने को भी बरकत का कारण बताया। उन्होंने कहा कि इंसान की इल्मी और लेखन संबंधी सेवाएं भी बरकत वाली हो सकती हैं। एक व्यक्ति कम समय में कोई किताब या लेख लिख सकता है, लेकिन वह सदियों तक लोगों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।

बरकत में रुकावट डालने वाली चीज़ों के बारे में उन्होंने कहा कि विश्वासघात, चोरी, झूठ और बदज़बानी इंसान की ज़िंदगी से बरकत छीन सकते हैं। इसलिए सच्चाई, ईमानदारी, तक़वा और नेकी को अपनाना ज़रूरी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वास्तविक बरकत अधिक धन रखने में नहीं, बल्कि उपलब्ध नेमतों से अधिक भलाई और लंबे समय तक लाभ प्राप्त करने में है।

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