रविवार 18 अक्टूबर 2026 - 08:10
महिलाओं और बच्चियों से उनका शरई अधिकार न छीना जाए

आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी ने आज़रबाइजान गणराज्य के अधिकारियों से मांग की है कि वे मुस्लिम महिलाओं और बच्चियों से हिजाब का शरई अधिकार न छीनें तथा उन्हें शिक्षा, शिक्षण और शैक्षणिक एवं सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी जैसे बुनियादी अधिकारों से वंचित न करें।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, ईरान के हौज़ा इल्मिया के प्रमुख आयतुल्लाह अली रज़ाआराफ़ी ने आज़रबाइजान के शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध के संबंध में एक बयान जारी किया है। इसमें उन्होंने हिजाब की शरई हैसियत और मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा पर ज़ोर दिया है। उनके बयान का पूरा पाठ इस प्रकार है:

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

हिजाब और पहनावे का मुद्दा, विशेष रूप से इस्लाम में सम्मानित महिलाओं के लिबास का मामला, पवित्र धर्म इस्लाम, इस्लामी जीवनशैली और प्रामाणिक इस्लामी परंपराओं में हमेशा से एक शरई कर्तव्य रहा है। मूल रूप से, शरई दायित्वों को सरकारी आदेशों, प्रशासनिक निर्देशों और मनुष्यों द्वारा बनाए गए कानूनों के माध्यम से समाप्त नहीं किया जा सकता और न ही मुसलमानों से उनकी धार्मिक अनिवार्यता को समाप्त किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त, इस्लाम की आस्था-व्यवस्था में हिजाब मुस्लिम महिला के ईमान, पवित्रता और धार्मिक पहचान का प्रतीक है। यह मोमिन महिलाओं की आस्था और उनके सचेत चुनाव से उत्पन्न होता है। किसी भी मुस्लिम देश को यह अधिकार नहीं है कि वह अपने सामाजिक जीवन में महिलाओं और बच्चियों से उनका यह शरई अधिकार छीन ले और मानवाधिकारों तथा मानवीय गरिमा के विरुद्ध कदम उठाते हुए उन्हें शिक्षा प्राप्त करने, शिक्षण कार्य करने और शैक्षणिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में भाग लेने के अधिकार से वंचित करे।

अल्लाह तआला सूरह नूर की आयत 31 में फ़रमाता है:

“और मोमिन महिलाओं से कह दीजिए कि वे अपनी निगाहें नीची रखें, अपनी पाकदामनी की रक्षा करें और अपनी सजावट को प्रकट न करें, सिवाय उसके जो स्वयं प्रकट हो जाए। और वे अपनी ओढ़नियों को अपने सीनों पर डाले रखें...” (सूरह नूर, आयत 31)

इस नूरानी आयत की रोशनी में महिलाओं के लिए आवश्यक है कि वे गैर-महरम पुरुषों के सामने अपने सिर और गर्दन को ढकें तथा इस्लामी हिजाब का पालन करें। किसी को भी सरकारी आदेशों और मनुष्यों द्वारा बनाए गए कानूनों के माध्यम से पवित्र क़ुरआन के स्पष्ट आदेश का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है।

आज़रबाइजान गणराज्य में हिजाब का मामला भी इसी प्रकार का है, जहाँ हाल के समय में सरकारी हलकों और कुछ संस्थानों की ओर से सम्मानित शिक्षिकाओं और छात्राओं पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। इस देश की अधिकांश आबादी मुस्लिम है। इसलिए अधिकारियों और संबंधित ज़िम्मेदार लोगों से अपेक्षा की जाती है कि वे इस मुस्लिम और धार्मिक पहचान वाली धरती की छात्राओं तथा शिक्षिकाओं की शरई मांगों का सम्मान करें।

ये मांगें पवित्र क़ुरआन और अहले बैत (अलैहिमुस्सलाम) की शिक्षाओं पर आधारित हैं। अधिकारियों को चाहिए कि वे जनता की धार्मिक पहचान और उसकी मज़हबी मांगों को आहत होने से बचाएँ तथा मुस्लिम महिलाओं को अपने शरई अधिकारों के अनुसार जीवन जीने का अधिकार दें।

आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी
प्रमुख, ईरान का हौज़ा इल्मिया

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