शुक्रवार 16 अक्टूबर 2026 - 20:21
हज़रत ज़ैनब (स) ज्ञान, त्याग, दृढ़ संकल्प और आत्मनिर्भरता की बेमिसाल हस्ती हैंः मौलाना मुहम्मद मेराज रन्नवी

चेन्नई के पैरिस में इमामे जुमा मौलाना मुहम्मद मेराज रन्नवी ने जुमे के ख़ुतबे में बच्चियों की परवरिश हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा की सीरत की रोशनी में करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि हज़रत ज़ैनब की सीरत केवल श्रद्धा का विषय नहीं, बल्कि ज्ञान, चरित्र, सत्यवादिता, सब्र व इस्तिक़ामत और नई पीढ़ी की तरबीयत के लिए एक व्यावहारिक आदर्श है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के चेन्नई स्थित पैरिस में इमामे जुमा मौलाना मुहम्मद मेराज रनवी ने जुमे के ख़ुतबे में हज़रत ज़ैनब बिन्ते अली सलामुल्लाह अलैहा के फ़ज़ाइल और मनाक़िब बयान करते हुए आपकी शख़्सियत को ज्ञान, त्याग, दृढ़ संकल्प, आत्मनिर्भरता और मज़बूत इरादे की बेमिसाल मिसाल बताया।

मौलाना मुहम्मद मेराज रनवी ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया में किसी भी शख़्सियत की हैसियत, हिम्मत, दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति का आकलन उसके व्यावहारिक चरित्र से किया जाता है। व्यावहारिक जीवन में इंसान की कार्यशैली ही उसकी शख़्सियत को उजागर करती है और उसके स्थान व प्रतिष्ठा को स्पष्ट करती है। इस दृष्टि से हज़रत ज़ैनब बिन्ते अली सलामुल्लाह अलैहा का व्यक्तित्व मानव इतिहास में अद्वितीय और बेमिसाल स्थान रखता है।

हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा के इल्मी स्थान और ज्ञान को स्पष्ट करते हुए इमामे जुमा ने इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम के इस कथन को प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया:

«يَا عَمَّتَاهُ، أَنْتِ بِحَمْدِ اللَّهِ عَالِمَةٌ غَيْرُ مُعَلَّمَةٍ، وَفَهِمَةٌ غَيْرُ مُفَهَّمَةٍ» ऐ फूफी जान! अल्लाह के फ़ज़ल से आप ऐसी विदुषी हैं, जिन्हें किसी ने शिक्षा नहीं दी, और ऐसी समझदार एवं दूरदर्शी हैं, जिन्हें किसी ने समझाया नहीं।

मौलाना ने इस कथन की रोशनी में हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा के इल्मी स्थान, असाधारण समझ-बूझ और उच्च आध्यात्मिक मक़ाम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने आपकी सीरत को अहले ईमान के लिए मार्गदर्शक बताया।

जुमे के ख़ुतबे के समापन पर मौलाना मुहम्मद मेराज रनवी ने मोमिन पुरुषों और महिलाओं को हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा की विलादत-ए-बासआदत की मुबारकबाद दी। उन्होंने विशेष रूप से माता-पिता से आग्रह किया कि वे अपनी बच्चियों की परवरिश हज़रत ज़ैनब की सीरत, ज्ञान, हया, साहस, त्याग और इस्तिक़ामत की रोशनी में करें तथा उन्हें इस महान हस्ती की शिक्षाओं और आदर्श चरित्र से जुड़ने की प्रेरणा दें।

मौलाना ने वैश्विक परिस्थितियों पर अफ़सोस जताते हुए अत्याचारियों के अंत, मज़लूमों की सफलता और विशेष रूप से पवित्र देश ईरान की विजय एवं गौरव के लिए दुआ की। उन्होंने इमाम-ए-ज़माना अज्जलल्लाहु तआला फरजहुश्शरीफ के ज़ुहूर-ए-पुर्नूर के लिए भी विशेष दुआएँ कीं।

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