हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के क़ुम शहर में हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मोहम्मद रज़ा बरतेह ने इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता के संदेशों को समझने और उनकी सही व्याख्या करने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि इस्लामी गणराज्य ईरान की शक्ति को केवल भौतिक, सैन्य, आर्थिक और भौगोलिक मानदंडों से नहीं मापा जा सकता। ईश्वरीय गणना के अनुसार, जनता का ईमान, राष्ट्र का संकल्प, ईश्वरीय सहायता और इस्लामी क्रांति की लोगों के दिलों को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता ईरान को ऐसी ताक़त प्रदान करती है, जिसे दुश्मन अपने भौतिक मानदंडों से समझने में असमर्थ हैं।
हौज़ा इल्मिया के अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपाध्यक्ष और छात्रों के मार्गदर्शन एवं आकर्षण केंद्र के प्रमुख हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मोहम्मद रज़ा बरतेह ने क़ुम में हौज़ा इल्मिया के प्रबंधन केंद्र के ‘बसीज शोहदाए रूहानी’ शिविर के 223वें रात्रिकालीन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्वोच्च नेता की विचारधारा को समझने के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि हमने मासूम इमामों (अ) का ज़माना नहीं देखा और न ही यह देखा कि पवित्र क़ुरआन पैग़म्बरे इस्लाम (स) के मुबारक हृदय पर किस प्रकार अवतरित हुआ और उन्होंने ईश्वरीय ज्ञान की व्याख्या कैसे की। हालांकि, हमें यह सौभाग्य प्राप्त है कि हम उनके वंशज और वर्तमान रहबर के समकालीन हैं तथा उनके मार्ग में उनके साथ हैं।
उन्होंने सर्वोच्च नेता के संदेशों को समझने और दूसरों तक पहुंचाने की सामूहिक जिम्मेदारी पर ज़ोर देते हुए कहा कि प्रिय बहनों और भाइयों! हम सभी सर्वोच्च नेता के संदेश प्राप्त करते हैं। ये संदेश विभिन्न मुद्दों और परिस्थितियों के अनुसार समय-समय पर हम तक पहुंचते हैं। अब हमारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि हम इन संदेशों को सही ढंग से ग्रहण करें, समझें और दूसरों के सामने बेहतर तरीके से प्रस्तुत करें।
हौज़ा इल्मिया के अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपाध्यक्ष ने कहा कि यदि हमसे पूछा जाए कि सर्वोच्च नेता की वैचारिक और ज्ञान संबंधी व्यवस्था क्या है, उनका उद्देश्य क्या है, वे हमसे क्या चाहते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए किस प्रकार का भविष्य देखते हैं, तो हम इन सवालों का जवाब तभी दे सकते हैं, जब हमने उनके संदेशों को प्राप्त किया हो, सुना हो, समझा हो और उनकी व्याख्या की हो।
उन्होंने कहा कि कुछ संदेशों को समझना आसान नहीं होता। उनमें ऐसे गहरे और सूक्ष्म बिंदु तथा जटिलताएं होती हैं, जिनके लिए गंभीर चिंतन और गहन अध्ययन की आवश्यकता होती है।
ईश्वरीय गणना के अनुसार ईरान के विश्व की पहली शक्ति होने का अर्थ
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन बरतेह ने सर्वोच्च नेता के एक हालिया बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके संदेश में एक ऐसा वाक्य सामने आया, जिसने दुनिया भर में अनेक लोगों को चिंतित कर दिया। उन्होंने कहा था कि कुछ लोग हमें दुनिया की चौथी सबसे बड़ी शक्ति मानते हैं, लेकिन ईश्वरीय गणना के अनुसार हम पहली शक्ति हैं।
उन्होंने दुश्मन के मीडिया और विश्लेषकों के बीच इस बयान पर हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि वे यह जानने का प्रयास कर रहे थे कि सर्वोच्च नेता ने ईरान को पहली शक्ति किस आधार पर कहा है। इस विषय पर अनेक लेख, कार्यक्रम, चर्चाएं और विश्लेषण सामने आए, जिनमें इस बयान के अर्थ को स्पष्ट करने की कोशिश की गई।
उन्होंने कहा कि हमें भी स्वयं से यह सवाल करना चाहिए कि दुनिया की पहली शक्ति होने का क्या अर्थ है? क्या हमारी अर्थव्यवस्था दुनिया में पहले स्थान पर है? क्या हमारी आबादी, भौगोलिक क्षेत्रफल और सैन्य शक्ति हमें पहला स्थान दिलाते हैं? जब कहा जाता है कि हम पहली शक्ति हैं, तो वास्तव में इसका क्या अर्थ है? प्रत्येक व्यक्ति इस प्रश्न का अपना उत्तर दे सकता है, लेकिन सर्वोच्च नेता के बयान में गहरा अर्थ निहित है, जिस पर विचार करना आवश्यक है।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन बरतेह ने इस्लामी क्रांति की विचारधारा में शक्ति की अवधारणा और विश्व की साम्राज्यवादी शक्तियों के दृष्टिकोण के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि बड़ी विश्व शक्तियां आमतौर पर अपने युद्धपोतों, लड़ाकू विमानों, व्यापक विनाश करने वाले हथियारों, रासायनिक हथियारों और विनाशकारी साधनों की संख्या गिनाकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करती हैं। लेकिन सर्वोच्च नेता के बयान में इस प्रकार के मानदंडों का उल्लेख नहीं किया गया। इसमें कहा गया है कि हम पहली शक्ति हैं, न कि केवल एक बड़ी विश्व शक्ति।
उन्होंने कहा कि हमें इन दोनों अवधारणाओं के बीच अंतर को समझना चाहिए। जब हम कहते हैं कि एक खिलाड़ी दूसरे से अधिक शक्तिशाली है या एक देश दूसरे देश से अधिक ताक़तवर है, तो इसका क्या अर्थ होता है? शक्ति का अर्थ है प्रभाव डालने और विरोधी को घुटने टेकने पर मजबूर करने की क्षमता। यह अर्थ उसी के लिए सही है, जिसके पास वास्तव में शक्ति और सामर्थ्य हो, न कि किसी काल्पनिक विचार या मानसिक धारणा के लिए।
अंत में, हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन बरतेह ने राष्ट्रों की शक्ति का आकलन करने में ईश्वरीय दृष्टिकोण की भूमिका पर ज़ोर देते हुए कहा कि यहां ईश्वरीय गणना का महत्व सामने आता है। यदि मैं ईश्वरीय दृष्टिकोण से देखूं, तो ईरान को शक्तिशाली पाऊंगा, लेकिन यदि मेरे पास यह दृष्टि नहीं है, तो संभव है कि मुझे उसकी वास्तविक शक्ति दिखाई न दे।
उन्होंने कहा कि ईश्वरीय गणना के अनुसार ईरान के पहली शक्ति होने का अर्थ यह है कि उसकी क्षमताओं और सामर्थ्य का आकलन केवल भौतिक मानदंडों के आधार पर नहीं, बल्कि एक अलग दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए।
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