हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, महदवियत पर आयोजित साप्ताहिक कक्षा को संबोधित करते हुए हुज्जतुल इस्लाम मौलाना नक़ी महदी ज़ैदी ने कहा कि इमाम-ए-अस्र (अ) के करीब होने का एक रास्ता उनसे मोहब्बत करना और उनके साथ अपने संबंधों को व्यक्त करना है।
उन्होंने कहा कि हम सभी जानते हैं कि ग़ैबत के दौर में इमाम (अ) की आज्ञाकारिता हम पर अनिवार्य है। हमारे इमाम हज़रत इमाम महदी (अ) हैं और इमामत तथा मार्गदर्शन की जिम्मेदारी उन्हीं पर है। इमाम (अ) को कायनात में प्रभाव और अधिकार प्राप्त है। वे अल्लाह की इच्छा और उसकी प्रदान की गई शक्ति के अनुसार जो चाहें, कर सकते हैं। इमाम (अ) दीन के संरक्षक और उसके मामलों में अधिकार रखने वाले हैं तथा इस दौर में उनसे बढ़कर कोई नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि इन उच्च पदों और विशेषताओं के अतिरिक्त, इमाम (अ) वह हस्ती हैं जो शिया समुदाय के दिलों की गहराइयों में बसती हैं। वे हमसे करीब हैं और हम पर असीम मोहब्बत, रहमत और कृपा करते हैं। प्रत्येक मनुष्य अपनी पाकीज़ा प्रकृति और आंतरिक खोज के आधार पर इमाम-ए-अस्र (अ) को चाहता है और उनसे मोहब्बत करता है। चूंकि मोहब्बत दोतरफा होती है, इसलिए इमाम (अ) की ओर से अपने चाहने वालों के लिए मोहब्बत हमेशा अधिक होती है।

उन्होंने इस संबंध में एक शेर का हवाला देते हुए कहा: “जब तक महबूब की ओर से आकर्षण न हो, तब तक बेबस आशिक की कोशिश किसी मंजिल तक नहीं पहुंच सकती।”
हुज्जतुल इस्लाम मौलाना नक़ी महदी ज़ैदी ने आगे कहा कि इमाम (अ) अपने शियों से मोहब्बत करते हैं, उनके लिए दुआ और इस्तिग़फ़ार करते हैं, उनकी चिंता करते हैं और उनसे कभी ग़ाफ़िल नहीं रहते। जब हमारे पास इतनी मोहब्बत करने वाली और सम्माननीय हस्ती मौजूद है, जिसे हम जानते और पहचानते हैं, तो फिर हम दूसरों से दिल क्यों लगाएं? अपना दिल किसी और के हवाले क्यों करें? हम किसी फुटबॉल खिलाड़ी के दीवाने क्यों बनें? किसी हीरो, खूबसूरत व्यक्ति, आकर्षक चेहरे या सुरीली आवाज़ वाले इंसान पर अपना सब कुछ क्यों न्योछावर करें?
उन्होंने कहा कि आप सभी इमाम (अ) से दिल की गहराइयों से मोहब्बत करने और अपने दिलों को उनकी याद से रोशन रखने के लिए इस कक्षा में आए हैं। इमाम से मोहब्बत ही आपको यहां खींचकर लाई है, जबकि आजकल आपकी उम्र के बहुत से लोग दूसरे कामों में व्यस्त रहते हैं।
आप यहां इसलिए आए हैं ताकि अपने इमाम (अ) को याद कर सकें, उनके करीब हो सकें और उनकी सेवा करने के तरीके सीख सकें। उन्होंने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब आपके पास ऐसा अनमोल रत्न, ऐसा अमृत और ऐसा कीमती आध्यात्मिक खजाना मौजूद है, तो आप उसके प्रति समर्पित क्यों नहीं होते?
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी को दुनिया का सबसे कीमती हीरा दिया जाए, लेकिन वह धूल से ढका हुआ, गंदा और बदसूरत हो, तो शायद वह उसे देखना भी पसंद न करे, उससे लाभ उठाना तो दूर की बात है।

मौलाना नक़ी महदी ज़ैदी ने कक्षा के अंत में कहा कि इमाम-ए-अस्र (अ) की मोहब्बत, उनसे संबंध और उनके करीब पहुंचने का रास्ता चुनने से अधिक मूल्यवान रत्न और क्या हो सकता है? इमाम (अ) ऐसी महान और प्रिय हस्ती हैं, जिनसे बढ़कर दुनिया में कोई भी अधिक प्रिय, सम्माननीय और अज़ीज़ नहीं है।
उन्होंने कहा कि हमें अपने दिल में मौजूद मोहब्बत के इस अनमोल रत्न को गुनाहों की गर्द से साफ करना चाहिए और उसे संवारना चाहिए, ताकि हम उससे बेहतरीन तरीके से लाभ उठा सकें।
अंत में उन्होंने आगामी सप्ताह के लिए एक व्यावहारिक कार्य बताते हुए कहा कि सभी लोग इस बात पर विचार करें कि वे अपने प्रेम के इस अनमोल रत्न को गुनाहों से कैसे पाक-साफ और चमकदार बना सकते हैं।
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