हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, 17 अक्टूबर को हुई हिंसा के बाद लागू की गई पाबंदियों पर प्रतिक्रिया देते हुए फ्रांस की वामपंथी पार्टी ‘ला फ्रांस इंसूमिज़’ ने सरकार की नीतियों की आलोचना की और चेतावनी दी कि प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। पार्टी ने नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
वामपंथी पार्टी ‘ला फ्रांस इंसूमिज़’ (LFI) ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को फ्रांस में प्रदर्शनों पर प्रतिबंध और लागू किए गए कर्फ़्यू की निंदा की। पार्टी ने सरकार पर ‘सत्तावादी रास्ते पर तेज़ी से आगे बढ़ने’ का आरोप लगाया और ट्रेड यूनियनों तथा श्रमिक संगठनों के साथ मिलकर जनता से शांतिपूर्ण ढंग से लामबंद होने की अपील की।
पार्टी ने एक बयान में कहा, “नागरिक स्वतंत्रताओं को ऐसी सरकार की नीतियों में बदलाव के लिए इस्तेमाल होने वाला साधन नहीं बनाया जा सकता, जो हालात पर अपना नियंत्रण खो रही है।” इस वामपंथी संगठन ने यह भी कहा कि नागरिक स्वतंत्रताओं की गारंटी देना ‘एक गणतांत्रिक सरकार का पहला कर्तव्य’ है।
‘ला फ्रांस इंसूमिज़’ ने सभाओं पर प्रतिबंध, उनके आयोजकों पर लगाई गई पाबंदियों और शहरों तथा स्थानीय क्षेत्रों में कर्फ़्यू लागू करने की आलोचना की। पार्टी ने दुकानदारों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के मालिकों को निजी सुरक्षा कंपनियों की सेवाएँ लेने के लिए प्रोत्साहित किए जाने पर भी आपत्ति जताई।
पार्टी के अनुसार, सरकार इन फैसलों के ज़रिए “एक-एक करके उन सीमाओं को पार कर रही है, जो लोकतंत्र को सत्तावादी और पुलिसिया शासन से अलग करती हैं।”
इस वामपंथी दल ने इन उपायों की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने के फैसलों को “मूर्खतापूर्ण और अराजकता पैदा करने की आशंका वाले फैसले” बताया। पार्टी का कहना है कि ऐसे फैसले न तो सरकार की नीतियों के प्रति जनता के गुस्से को खत्म कर सकते हैं और न ही लोगों की सड़कों पर उतरकर विरोध जताने की इच्छा को कम कर सकते हैं। इसके बजाय, इनसे झड़पें और हिंसा बढ़ने की आशंका है।
‘ला फ्रांस इंसूमिज़’ के अनुसार, इन प्रतिबंधों के कारण दमनकारी पुलिस को तय मार्गों और घोषित आयोजकों वाली रैलियों का प्रबंधन करने के बजाय बिखरी हुई और अप्रत्याशित सभाओं का सामना करना पड़ सकता है।
पार्टी के बयान में आगे कहा गया, “सामूहिक शक्ति और बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ही तनाव बढ़ाने और हालात को लगातार बिगाड़ने की इस रणनीति को विफल कर सकती है।”
पार्टी ने फ्रांस भर के लोगों से ट्रेड यूनियनों, श्रमिक संगठनों, छात्र संगठनों और स्कूली विद्यार्थियों के संगठनों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में भाग लेने तथा संयुक्त और समन्वित रैलियों की सुरक्षा में सहयोग करने की अपील की।
इस संगठन ने उन फैसलों को रद्द कराने के लिए संगठनों और ट्रेड यूनियनों की कानूनी कार्रवाई का भी समर्थन किया, जिन्हें वह ‘मनमाना और अस्वीकार्य’ मानता है। अंत में पार्टी ने सरकार से श्रमिकों और युवाओं की मांगों का जवाब देने की अपील की।
यह बयान फ्रांस के कई शहरों में महँगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान 17 अक्टूबर, शनिवार को हुई हिंसा और लूटपाट की घटनाओं के बाद आया है।
इन घटनाओं के दौरान कई दुकानों और सार्वजनिक इमारतों को निशाना बनाया गया। लिमोज शहर का नगरपालिका भवन भी आग लगने से बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने वाली जगहों में शामिल था।
फ्रांस के न्याय मंत्री जेराल्ड दारमानिन द्वारा गुरुवार, 22 अक्टूबर को जारी आँकड़ों के अनुसार, सप्ताहांत में हुई हिंसा के बाद 2,700 लोगों को पुलिस हिरासत में लिया गया, जबकि 217 लोगों को जेल भेजा गया।
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