हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस में सरकार की आर्थिक नीतियों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गए हैं। 24 अक्टूबर को दूसरे चरण के प्रदर्शनों की घोषणा के बाद सरकार ने पेरिस सहित प्रमुख शहरों में 70 हज़ार से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात करने का निर्णय लिया है। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने 5 नवंबर को देशव्यापी हड़ताल की तैयारी भी शुरू कर दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, 17 अक्टूबर को हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार विरोधी संगठनों ने 24 अक्टूबर को दोबारा सड़कों पर उतरने की अपील की है। प्रदर्शनकारी आर्थिक पाबंदियों और सरकारी खर्चों में कटौती की नीतियों का विरोध करते हुए आंदोलन और हड़तालों का दायरा बढ़ाना चाहते हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 17 अक्टूबर के प्रदर्शनों में पूरे फ्रांस में 8 लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया था। इन प्रदर्शनों में छात्रों, युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी ने आंदोलन को और मज़बूती प्रदान की।
सरकार ने प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए कड़े सुरक्षा उपाय किए हैं। इसके तहत 70 हज़ार से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ विशेष सुरक्षा बलों को भी तैनात करने की योजना है। सरकारी इमारतों की सुरक्षा के लिए सैनिकों की तैनाती की भी संभावना जताई गई है।
प्रदर्शनों पर पाबंदियाँ और कानूनी कार्रवाई
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने विरोध प्रदर्शनों पर नई पाबंदियाँ लगाई हैं और कुछ शहरों में लोगों की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। पेरिस में मज़दूर संगठनों के प्रस्तावित प्रदर्शन का मार्ग भी बदल दिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि गिरफ्तार किए गए कुछ छात्रों के साथ सख़्त व्यवहार किए जाने और प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कठोर दंडात्मक कार्रवाई को लेकर भी आपत्तियाँ सामने आई हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य लोगों को प्रदर्शनों में भाग लेने से रोकना है।
रिपोर्ट में फ्रांस में नस्लवादी रवैये के बढ़ने पर भी चिंता जताई गई है। इसमें चेतावनी दी गई है कि राजनीतिक तनाव के दौरान ऐसे रुझान सामाजिक परिस्थितियों को और बिगाड़ सकते हैं।
5 नवंबर को देशव्यापी हड़ताल की तैयारी
प्रदर्शनकारियों का ध्यान अब 5 नवंबर को होने वाली हड़ताल पर भी केंद्रित है। फ्रांस के जनरल कन्फेडरेशन ऑफ लेबर (CGT) ने इस दिन व्यापक स्तर पर हड़ताल आयोजित करने की अपील की है।
रिपोर्ट के अनुसार, टूलूज़ की मिराइल यूनिवर्सिटी में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लगभग 800 मज़दूरों ने एक बैठक में भाग लिया। इनमें उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामान की आपूर्ति से जुड़े क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल थे। बैठक में हड़ताल की अपील को प्रभावी बनाने और निरंतर विरोध प्रदर्शन के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख माँगों में आर्थिक सख़्ती की नीतियों को समाप्त करना, सरकारी सेवाओं के लिए संसाधन बढ़ाना, वेतन में वृद्धि करना और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों, विशेष रूप से विरोध प्रदर्शन के अधिकार, की रक्षा करना शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलनकारी 24 अक्टूबर के प्रदर्शनों को 5 नवंबर की देशव्यापी हड़ताल की तैयारी के रूप में देख रहे हैं। उनका उद्देश्य प्रदर्शनों और हड़तालों का विस्तार करके सरकार की आर्थिक नीतियों में बदलाव की माँग को मज़बूत करना है। इसके साथ ही वे राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सहित प्रमुख सरकारी अधिकारियों के इस्तीफ़े की माँग भी उठा रहे हैं।
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