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दिन की हदीस
धार्मिकख़ुदा के नज़दीक सबसे पसंदीदा अमल
अमीरुल मोमेनीन इमाम अली (अ) ने एक रिवायत में नमाज़ की फ़ज़ीलत और उसे वक़्त पर अदा करने की अहमियत की ओर इशारा फ़रमाया है।
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धार्मिकलोकतंत्र का बदलता चेहरा और मुसलमानों के लिए सिमटती ज़मीन!
भारत की लोकतांत्रिक पहचान उसके संविधान, बहुलतावाद और धार्मिक विविधता पर आधारित रही है। लेकिन नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद इस लोकतांत्रिक ढांचे की बुनियादें कमजोर होती दिखाई देने लगीं।…
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धार्मिकइमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत और ऐतिहासिक रुकावटें
तारीख गवाह है कि ज़ालिम हुक्मरान हमेशा कर्बला को ज़ुल्म और इस्तिबदाद के खिलाफ बेदारी, हक़गोई, आज़ादी और मुज़ाहिमत का मरकज़ समझते रहे। इसी लिए उन्होंने हर दौर में ज़ाइरिन-ए-इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम…
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धार्मिकआशूरा की घटना आज तक क्यों ज़िंदा है?
इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने 10 मुहर्रम 61 हिजरी को अपना सब कुछ क़ुर्बान करके यह साबित कर दिया कि दीन, हक़ और उसूलों पर कभी समझौता नहीं किया जा सकता।
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धार्मिकपक्का ईमान ही इंसान को निडर बनाता है!
आज तक जितनी भी महान हस्तियों का अन्यायपूर्वक ख़ून बहाया गया है, उसका मुख्य कारण यही रहा है कि या तो लोगों में सही समझ (बसीरत) की कमी थी या फिर ईमान कमज़ोर था। इसी कारण इंसान ज़ालिम से डरता है…
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धार्मिकहक़ के बचाव में डट जाना
अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अ) ने एक रिवायत में बातिल के मुक़ाबले में डट जाने और स्थिरता पर ज़ोर दिया है।
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धार्मिकअमेरिका एक बार फिर अपने वादे से मुकर गया!!
इतिहास गवाह है कि वास्तविक इस्लाम के मुजाहिद कभी दुश्मन के सामने सिर नहीं झुकाते। उनका संबंध कर्बला से जुड़ा हुआ है। कर्बला वालों ने दुश्मन के सामने अपने सिर तो कटवा दिए, लेकिन कभी अपना सिर नहीं…
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लेखक : सैय्यद अली हाशिम आब्दी
धार्मिकइतिहास के कटघरे में एक अबदी सवाल
हौज़ा / कुछ सवाल ऐसे होते हैं जो सदियाँ बीत जाने के बाद भी कभी पुराने नहीं होते। समय की धूल उनकी चमक को धुंधला नहीं कर सकती, सल्तनतों की हैबत उनकी आवाज़ को ख़ामोश नहीं कर सकती और अकीदत के गहरे…
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धार्मिककर्बला का रास्ता कभी नहीं रुकता!
शिलमचा की धरती पर जब धमाकों की गूंज उठी, वातावरण बारूद की गंध से भर गया और हुसैन (अ) के दो प्रेमियों ने अपने खून से कर्बला के रास्ते को लाल कर दिया, तो शायद दुनिया ने सोचा होगा कि डर की ये लपटें…
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धार्मिकग़ैबत के ज़माने में उम्मत की धार्मिक और सामाजिक ज़िम्मेदारियाँ
हौज़ा / ध्यान देने वाली बात है कि अगर हमारे हालात और हमारे बुरे आमाल सैकड़ों साल पहले इमाम सादिक़ अ.स. को बेचैन हो कर रोने पर मजबूर कर सकती है तो क्या हमारी ज़िम्मेदारी नहीं बनती कि हम इस ग़ैबत…
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दिन की हदीसः
धार्मिकजिन लोगों का अपना दामन ऐबों से भरा होता है, वही दूसरों की कमियों को फैलाते फिरते हैं
अमीरुल मोमिनीन हज़रत इमाम अली (अ) ने एक रिवायत में उन लोगों के बारे में बताया है जो दूसरों के ऐबों और कमियों को फैलाते हैं तथा इसके पीछे छिपे कारण को स्पष्ट किया है।
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धार्मिकअगर युद्ध अपने अंतिम और सबसे खतरनाक चरण तक पहुँच जाए!
युद्धों का फैसला हमेशा युद्धभूमि में नहीं होता। कई बार असली मुकाबला इस बात का होता है कि कौन-सा देश अपनी अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढाँचे, ऊर्जा, संचार व्यवस्था और राष्ट्रीय मनोबल को अधिक समय तक…
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धार्मिकइंटरनेट और डिजिटल स्पेस की निगरानी में अमेरिकी शासन शैली
11 सितंबर की घटना के बाद से व्हाइट हाउस के नेताओं ने यह दिखाया है कि इंटरनेट और डिजिटल स्पेस की क्षमताओं के उपयोग के तरीके के संबंध में वे अपनी शासन शक्ति के प्रयोग को लेकर बहुत गंभीर हैं और…
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धार्मिकमअरफ़त ए इमाम
"मअरफ़त-ए-इमाम" का अर्थ है इमाम को सही रूप से पहचानना, उनके इलाही मक़ाम को समझना, उनकी शिक्षाओं को जानना और उनकी आज्ञा का पालन करना। मआरफ़त केवल जानकारी प्राप्त करने का नाम नहीं है, बल्कि दिल…
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दिन की हदीसः
धार्मिकबात को आगे बढ़ाने से पहले उस पर विचार करें
अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अ) ने एक हदीस में इस बात पर ज़ोर दिया है कि किसी बात को आगे सुनाने से पहले उसे गहराई से समझना और उस पर विचार करना चाहिए।
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धार्मिकआज के दौर में हमारे चिराग़ ए हिदायत कौन है?
इस युग में हमारे लिए चिराग़ ए हिदायत और कशती ए नेजात हज़रत इमाम महदी, हुज्जत इब्न अल-हसन अल-अस्करी (अ) हैं। इस तथ्य के प्रमाण शिया परंपरा की विश्वसनीय पुस्तकों में स्पष्ट रूप से मिलते हैं।
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धार्मिकरोज़ी भी इंसान को तलाश करती है
अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) ने अपने पुत्र के नाम लिखे एक पत्र में रोज़ी की वास्तविकता तथा उसे प्राप्त करने के प्रयास में मन की शांति और अल्लाह पर भरोसा रखने की आवश्यकता को स्पष्ट किया है।
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धार्मिकशहीद रहबर आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामनेई की ज़िंदगी से जवानों के लिए कुछ अहम सबक
शहीद रहबर आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामनेई का जीवन नौजवान पीढ़ी के लिए एक रोशन राहनुमा (मार्गदर्शक) है। उनका जीवन हमें बताता है कि जवानी महज़ एक उम्र नहीं, बल्कि जुर्रत (साहस), हिम्मत और…
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हालिया क्षेत्रीय स्थिति पर एक विचारोत्तेजक लेख
धार्मिकअमेरिकी सैन्य अड्डे: क्या मुस्लिम देश अपनी संप्रभुता स्वयं बेच रहे हैं? क्या अब भी सबक सीखने का समय नहीं आया?
यह कितनी अफसोस की बात है कि दुनिया में मुसलमानों की आबादी ढाई अरब है, 57 इस्लामी देश हैं, लेकिन दुख की बात है कि 34 करोड़ की आबादी वाला अमेरिका 21 लाख सैनिकों के बल पर पूरे 57 मुस्लिम देशों पर…
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धार्मिकक्या अहले बैत (अ) से प्रेम केवल हृदय की भावना और भावनात्मक लगाव है या एक धार्मिक कर्तव्य?
शिया फ़िक़्ह में 'तवल्ला' और 'तबर्रा' केवल नैतिक सलाह नहीं हैं, बल्कि नमाज़ और रोज़े की तरह एक धार्मिक कर्तव्य हैं।
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धार्मिकभलाई में तुरंत अमल
इमाम मुहम्मद बाक़िर (अ) ने एक रिवायत में ईमान वालों को नेक कामों में जल्दी करने और उन्हें टालने से बचने की हिदायत दी है।
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धार्मिकनाफ़ेअ इब्ने हिलाल इब्ने नाफ़ेअ इब्ने हमल इब्ने सअद
हौज़ा / आप का पूरा नाम नाफ़ेअ इब्ने हिलाल इब्ने नाफ़ेअ इब्ने हमल इब्ने सअद अलअशीरा इब्ने मदहज अलजमली था। आप बुजुर्गे कौम और शरिफुन्नफ्स थे। मिल्लत की सरदारी और रियासत आप की खानदानी विरासत थी। आप…
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धार्मिकमतभेद एक स्वाभाविक और वैज्ञानिक मामला; लेकिन सीमा क्या है?
मतभेद अपनी जगह एक स्वाभाविक और वैज्ञानिक मामला है और विभिन्न व्यक्तित्वों के राजनीतिक या प्रशासनिक फैसलों पर आलोचना भी की जा सकती है। हालाँकि यह बात अत्यंत खेदजनक है कि कभी-कभी सोशल मीडिया पर…
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धार्मिकसदी के अज़ीम शहीद; सर्वोच्च नेता सैयद अली खामनेई
28 फरवरी को सर्वोच्च नेता ने अपने जाननिसार साथियों, उच्च सैन्य कमांडरों, अपने सम्मानित परिवार, संतान, बेटी, बहू और क्रांतिकारी साथियों के साथ शहादत का प्याला पिया; यह घटना इस्लाम के इतिहास के…
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धार्मिकइमाम की मारफ़त क्यों ज़रूरी है?
सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि मारिफ़त से क्या मतलब है और इसके शाब्दिक अर्थ क्या हैं। इसके बाद यह बात स्पष्ट होगी कि हदीसों में मारिफ़त को इतनी अहमियत क्यों दी गई है और हमसे किस तरह की मारिफ़त…
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धार्मिकइमाम हुसैन अलैहिस्सलाम इंसानियत के अज़ीम इन्क़िलाबी रहनुमा
तारीख़ में बहुत से लोगों ने हालात बदलने की कोशिश की, लेकिन वाक़ए कर्बला और इमाम हुसैन (अ) का नाम वह इकलौती मिसाल है जिसने हर दौर के मज़लूमों और सच्चे लोगों को रास्ता दिखाया है। इमाम हुसैन (अ)…
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दिन की हदीस:
धार्मिकहजरत अली अलैहिस्सलाम की शहादत से मोहब्बत
हौज़ा / हज़रत इमाम अली अ.स.ने एक रिवायत में अपनी शहादत के बारे में,शहादत से मोहब्बत का इजहार किया है
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धार्मिकख़िताबत का मापदंड!
ख़िताबत केवल बोलने का नाम नहीं, बल्कि दिलों को जगाने की कला है। एक खतीब की महानता उसकी ऊँची आवाज़ से नहीं आँकी जाती, बल्कि इस बात से कि उसके शब्द श्रोताओं के दिल और दिमाग़ में कितनी गहराई से…
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धार्मिकबुज़दिल मुसलमान; मुस्लिम उम्मत के शरीर पर एक बेमेल पैबंद
कमज़ोर और भयभीत मुसलमान न केवल क़ुरआन की दृष्टि में कोई विशेष स्थान नहीं रखता, बल्कि वह उस मूल "सत्कर्म" (अमल-ए-सालेह) की भी उपेक्षा करता है, जिसे क़ुरआन सत्य के विरोधियों को क्रोधित करने वाला…
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धार्मिकहे शहीद रहबर! हे राह-ए-हुसैन (अ) के मुसाफिर, अलविदा!
आज हमने अपनी आँखों के आँसुओं के साथ आपके पवित्र पार्थिव शरीर को आपकी अंतिम विश्रामस्थली के सुपुर्द कर दिया। लेकिन आपका चिंतन, आपका चरित्र, आपका संकल्प और आपका संदेश कभी मिट नहीं पाएगा।