हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा सैय्यद अली ख़ामेनेई ने फरमाया,घर से बाहर के काम में मसरूफ़ होने की वजह से औरतें, बच्चों की पैदाइश से दामन बचाती हैं और इंसानी फ़ितरत के बरख़िलाफ़, ज़नाना जज़्बात का गला घोंटती हैं।
अल्लाह तआला उनके इस काम से राज़ी नहीं है। जो औरतें बच्चों की पैदाइश, औलाद की परवरिश, बच्चे को दूध पिलाने और मोहब्बत से अपनी गोद में पालने और बड़ा करने पर दूसरे कामों को, जो उनके बिना भी अंजाम पा सकते हैं, प्राथमिकता देती हैं, एक बड़ी ग़लती का शिकार हैं।
इंसान के बच्चे की तरबियत का बेहतरीन तरीक़ा यह है कि माँ की मोहब्बत के साए में परवरिश पाए। वो औरतें जो अपनी औलाद को इस तरह की अल्लाह की नेमत से वंचित रखती हैं, ग़लती का शिकार हैं। उनकी वजह से औलाद को भी नुक़सान पहुंचता है, ख़ुद भी नुक़सान उठाती हैं और समाज का भी नुक़सान करती हैं।
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