शनिवार 29 नवंबर 2025 - 11:32
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की संपत्ति कोई हज़म नहीं कर पाएगा।मौलाना सैयद रज़ा हैदर ज़ैदी

हौज़ा / मौलाना सैयद रज़ा हैदर जैदी ने लखनऊ में जुमआ की नमाज़ के खुत्बे में नमाज़ियों को अल्लाह का डर तक्वा की नसीहत करते हुए कहा कि अल्लाह तआला से दुआ है कि वह हमें तौफीक दे कि हम हमेशा उससे डरते रहें, उसका खौफ हमारे दिलों में बना रहे, यह एहसास बना रहे कि एक दिन मरकर उसकी बारगाह में जाना है और उसे जवाब देना है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,मौलाना सैयद रज़ा हैदर जैदी ने लखनऊ में जुमआ की नमाज़ के खुत्बे में नमाज़ियों को अल्लाह का डर तक्वा की नसीहत करते हुए कहा कि अल्लाह तआला से दुआ है कि वह हमें तौफीक दे कि हम हमेशा उससे डरते रहें, उसका खौफ हमारे दिलों में बना रहे, यह एहसास बना रहे कि एक दिन मरकर उसकी बारगाह में जाना है और उसे जवाब देना है।

मौलाना सैयद रज़ा हैदर जैदी ने आगे कहा कि लोग सोचते नहीं हैं, दुनिया में इतने उलझ जाते हैं कि उन्हें एहसास नहीं होता कि हमें किसी को जवाब देना है। दूसरों की संपत्ति हड़प लेते हैं, ग़ासिब बन जाते हैं और ग़ासिब बनकर फातिमी अय्याम-ए-अज़ा में जोर-जोर से रोते भी हैं और अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम के दुश्मनों और उनके हक के ग़ासिबों पर लानत भी करते हैं।

हदीस-ए-कुद्सी लोगों को डराइए कि वह व्यक्ति मेरे घर में दाखिल न हो जिसने ज़ुल्म करते हुए किसी की संपत्ति ग़सब की है। मैं उस पर उस वक्त तक लानत करता रहता हूँ जब तक वह नमाज़ पढ़ता रहता है। यहाँ तक कि वह लौटाई हुई ग़स्बी माल वापस न कर दे। को बयान करते हुए मौलाना सैयद रज़ा हैदर जैदी ने कहा कि कोई भाई का हक़ ग़स्ब किए है तो कोई चाचा का हक़ ग़स्ब किए है तो कोई किसी और का और हद तो यह है कि किसी ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की संपत्ति ग़स्ब कर ली है। और कान पकड़ कर मुँह पीट रहे हैं तो यह तौबा नहीं है। तौबा उस वक्त है जब इंसान ग़स्ब किया हुआ माल वापस कर दे।

मौलाना सैयद रज़ा हैदर जैदी ने अमीरुलमोमिनीन इमाम अली अलैहिस्सलाम की फज़ीलत बयान करते हुए कहा कि अगर कोई हकीकी तौबा कर ले तो वह इतना बुलंद होता है कि उसका शुमार शहीदों और सिद्दीकीन में होने लगता है।

तो जब तौबा करने वाले को यह मकाम हासिल होता है तो जिसकी पूरी ज़िंदगी में अद्ल (न्याय) हो उसकी क्या अज़ीम फज़ीलत होगी। जो यह कहे कि अगर अली को पूरी कायनात की हुकूमत दे दी जाए और यह मांग की जाए कि चींटी के मुँह से जौ का छोटा सा टुकड़ा ले लिया जाए तो अली हुकूमत को ठुकरा देगा चींटी पर ज़ुल्म नहीं करेगा।

मौलाना सैयद रज़ा हैदर जैदी ने कहा कि इन फातिमी अय्याम-ए-अज़ा से हमें यह दर्स मिलता है कि अगर किसी ने किसी की संपत्ति ग़स्ब की है, लूटी है तो वापस कर दे, चाहे किसी की मीरास हो या कोई और माल हो। और अगर किसी ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की संपत्ति लूटी है तो याद रखें कि कोई अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम की संपत्ति हज़म नहीं कर पाएगा।

फिजूलखर्ची का ज़िक्र करते हुए मौलाना सैयद रज़ा हैदर जैदी ने कहा कि 3 चुल्लू से वुज़ू हो जाता है, नल खोल कर पानी बहाने की ज़रूरत नहीं है। कोई यह न कहे कि हम बिल अदा कर देंगे। एक शरीफ शहरी होने के भी कुछ तकाजे होते हैं।

नज़ाफत का ज़िक्र करते हुए मौलाना सैयद रज़ा हैदर जैदी ने कहा कि इधर-उधर कूड़ा नहीं फेंकना चाहिए और न ही इधर-उधर थूकना चाहिए, यह काम कोई और कौम करे तो करे लेकिन जो सुबह-शाम आयते तत्हीर की तिलावत करती हो उसके लिए बिल्कुल मुनासिब नहीं है।

मौलाना सैयद रज़ा हैदर जैदी ने आगे कहा कि कुछ लोगों की आदत होती है कि वह जिस शहर में रहते हैं उसी की बुराई करते हैं, जबकि अमीरुलमोमिनीन इमाम अली अलैहिस्सलाम ने फरमाया,बेहतरीन शहर वह है जो तुम्हारा बोझ उठाए हुए है।अगर लखनऊ हमारा बोझ उठाए हुए है तो लखनऊ से बेहतर कोई शहर हमारे लिए नहीं है। हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम एक शरीफ शहरी बनें।

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