हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , ईरान के प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु हुज्जतुल इस्लाम हुसैन अन्सारियान ने ईमान और अच्छे कर्मों के आपसी संबंध पर जोर देते हुए कहा कि ये दोनों समाज की मुक्ति और उड़ान के लिए दो पंखों के समान हैं। उन्होंने कहा कि कुरआन बौद्धिक, नैतिक और व्यावहारिक बीमारियों का पूर्ण इलाज है।
उन्होंने कहा कि सूरह बक़रह से लेकर कुरआन के आखिरी पारे तक अल्लाह तआला ने बार-बार ईमान और अच्छे कर्मों पर जोर दिया है। ईमान बिना अमल के बेकार है और अमल बिना ईमान के बेफायदा।
अन्सारियान ने कहा,यदि समाज का एक छोटा सा वर्ग भी इन सिद्धांतों पर अमल करे तो उसका परिणाम पूरे समाज पर वसंत ऋतु की तरह नहीं होगा। ईमान और अमल का फायदा केवल उन्हीं व्यक्तियों तक सीमित रहेगा और अल्पसंख्यक की मेहनत से पूरे राष्ट्र की समस्याएं हल नहीं होंगी।
उन्होंने हज़रत नूह अलैहिस्सलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें 950 साल तक नबूवत देकर भेजा गया ताकि लोगों को बौद्धिक, नैतिक और व्यावहारिक बीमारियों से मुक्ति दिलाई जा सके। इन बीमारियों में बुरी सोच, दुर्भावना, कंजूसी, ज़ुल्म और बुरे कर्म शामिल हैं।
हुज्जतुल इस्लाम अन्सारियान ने स्पष्ट किया,इन बीमारियों का इलाज कुरआन करीम है। इमाम जाफर सादिक अलैहिस्सलाम फरमाते हैं कि जब तक दुनिया में हो, अपना इलाज खुद करो। وَنُنَزِّلُ مِنَ ٱلۡقُرۡءَانِ مَا هُوَ شِفَآءࣱ وَرَحۡمَةࣱ لِّلۡمُؤۡمِنِينَۙ وَلَا يَزِيدُ ٱلظَّـٰلِمِينَ إِلَّا خَسَارࣰا - (सूरह इसरा, आयत 82)
उन्होंने चेतावनी दी कि केवल कुरआन का घर में होना काफी नहीं है, बल्कि उस पर अमल ज़रूरी है। यदि कोई व्यक्ति बुरी सोच, दुर्भावना और बुरे कर्म में लिप्त है तो केवल सुंदर कुरआन रखने से उसका इलाज नहीं होगा।
उन्होंने समाज में जमाखोरी और वादाखिलाफी पर सख्त आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे हराम माल से ज़िंदगी सही नहीं होती। उन्होंने कहा कि नमाज़ भी यदि अख़लाक़ और रहमदिली पर असर न करे तो क़ुबूल नहीं होती।
आख़िर में उस्ताद अन्सारियान ने ज़ोर देकर कहा, जो समाज ईमान के बिना अमल या अमल के बिना ईमान रखता है न दुनिया में सुकून पाता है न आख़िरत में मुक्ति कुरआन हिदायत का पूर्ण नुस्खा है, मगर यह तभी प्रभावी होगा जब दिल से क़ुबूल किया जाए और अमल में लाया जाए।
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