बुधवार 21 जनवरी 2026 - 19:30
जो भी सत्य के विरोध में खड़ा होगा, निश्चित रूप से पराजित होगा

हौज़ा / हज़रत आयतुल्लाह जावादी आमोली ने कहा: कोई भी व्यक्ति जो सत्य के विरोध में खड़ा होगा, निश्चित रूप से पराजित होगा, लेकिन साथ ही, इस ब्रह्मांडीय व्यवस्था में प्रत्येक मनुष्य का यह दायित्व है कि वह अपना कर्तव्य ठीक प्रकार से पूरा करे।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हज़रत आयतुल्लाह जावादी आमोली ने क़ुम के मस्जिद ए आज़ाम में अपने साप्ताहिक नैतिकता के पाठ में अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अ.स.की रिवायत,जिसने भी सत्य के सामने अपना माथा ताना, वह नष्ट हो गया) की व्याख्या करते हुए कहा,सत्य के विरोध में खड़ा होना व्यक्ति और समाज के विनाश का कारण बनता है।

उन्होंने कहा,सत्य एक मजबूत, स्थिर और अजेय वास्तविकता है और पूरी ब्रह्मांडीय व्यवस्था सत्य के पक्ष में गवाही देती है। इसलिए कोई भी व्यक्ति या समाज जो सत्य के विरोध में खड़ा होगा, वह विनाश और पराजय का सामना करेगा।

हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा जावादी आमोली ने कहा,सृष्टि-व्यवस्था में कोई भी प्राणी मनुष्य की तरह पथभ्रष्टता और पाप में नहीं पड़ता। एकमात्र प्राणी जो कभी-कभी सत्य के मार्ग से भटक जाता है, वह मनुष्य है और यह विचलन या तो "अज्ञान" के कारण है, जिसे दूर करने की ज़िम्मेदारी हौज़ा और विश्वविद्यालय पर है, या फिर "वैयक्तिक मूर्खता" के कारण है, जिसे दूर करने की ज़िम्मेदारी मस्जिद और हुसैनिया तथा इमामबाड़े पर है।

लेकिन इमामत व्यवस्था और समुदाय की मुख्य ज़िम्मेदारी "जाहिलियत के उन्मूलन" और जाहिलियत को समाप्त करना है, जिसके आधार पर समाज को सत्य की ओर मार्गदर्शन दिया जाता है।

इस मरजा-ए तकलीद ने अपने भाषण के एक अन्य भाग में नहजुल बलाग़ा की हिकमत नंबर 91 "«إِنَّ هَذِهِ الْقُلُوبَ تَمَلُّ کَمَا تَمَلُّ الْأَبْدَانُ، فَابْتَغُوا لَهَا طَرَائِفَ الْحِکْمَةِ»
निश्चय ही ये दिल उकता जाते हैं जैसे शरीर उकता जाते हैं, तो उनके लिए बुद्धिमत्ता की नई-नई बातें खोजा करो) का हवाला देते हुए दिल की उदासी और थकान के मुद्दे पर बात करते हुए कहा,जिस प्रकार शरीर थक जाता है और उपचार, आराम और प्रबंधन का मोहताज होता है, उसी प्रकार दिल भी कभी-कभी उदास हो जाता है और इसका उपचार बुद्धिमत्ता की दुर्लभ बातें, हिक्मत भरी नसीहतें, ईश्वरीय आयतें, प्रार्थनाएं जैसे शाबानीय्या की मुनाजात और अहलेबैत स.ल. पवित्र स्थलों से लगाव है, क्योंकि यदि दिल थका हुआ हो तो मनुष्य अपनी इबादत से सही लाभ नहीं उठा सकता।

हज़रत आयतुल्लाह जावादी आमोली ने अपने नैतिकता के पाठ के समापन पर क़ुरान और अहलेबैत के साये में समाज, जिम्मेदार व्यक्तियों और इस्लामी व्यवस्था की सफलता के लिए दुआ की।

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