हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के रिपोर्ट से बातचीत मे अफ़ग़ानिस्तान के शिया उलेमा काउंसिल के प्रमुख आयतुल्लाह मुहम्मद हाशिम सालेही ने मरहूम आयतुल्लाहिल उज़्मा मिर्ज़ा नाईनी की याद मे अंतर्राष्ट्रीय कांफ़्रेंस के आयोजन के महत्व की ओर संकेत करते हुए इस उपाय को अज़ीम फ़क़ीह के इल्मी स्थान के अनुसार बताया और कहाः मरहूम नाईनी इस बात का अधिकार रखते थे कि वह उनके लिए एक अत्यंत महत्व और इल्मी व हौज़वी मानक के अनुसार प्रोग्राम आयोजित किया जाए।
उन्होने कहाः मिर्ज़ा नाईनी को हौज़ात ए इल्मिया पर बड़ा हक़ है और बहुत बड़े उलेमा इन के शिष्य रहे है। मरहूम आयतुल्लाह ख़ूई और मरहूम शहीद आयतुल्लाह सय्यद मुहम्मद बाक़िर सद्र जैसी शक्सियते सब इसी अज़ीम उस्ताद के शिष्य मे शामिल थे। फ़क़ाहत और इल्म उसूल के हिसाब से मरहूम नाईनी निहायत पढ़ी लिखी शखसियत थे और फ़िक्ह और उसूल मे बहुत माहिर थे।
आयतुल्लाह सालेही ने आगे कहा कि उलेमा को हमेशा ध्यान का केद्रं होना चाहिए विशेषकर वह लोग जिन्होने जीवन मे जनता, इस्लाम और हौज़ात ए इल्मिया की सेवा की और इल्म व फ़ज़ीलत की प्राप्ती के लिए बड़े विद्वानो की तरबीयत की। ऐसे बड़े लोगो को हमेशा जनता की दृष्टि मे रहना चाहिए और उनके लिए दुआ की जानी चाहिए।
अफ़ग़ानिस्तान की शिया उलेमा काउंसिल के प्रमुख ने मरहूम मिर्ज़ा नाईनी के उसूली मबानी के बुलंद मक़ाम पर ज़ोर देते हुए कहा कि इस अज़ीम फ़क़ीह के उसूली निहायत आला मरतबा रखते थे और मरहूम आयतुल्लाह ख़ूई हमेशा फ़रमाया करते थे कि हम उनके शिष्य थे और हमने जो कुछ पढ़ाया जाता था वह मिर्ज़ा नाईनी के उसूल व मबानी से लिया हुआ होता था।
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