गुरुवार 29 जनवरी 2026 - 13:37
ईरान के ख़िलाफ़ साज़िशें नाकाम होंगी, रहबर ए इंक़ेलाब की क़यादत इस्लामी निज़ाम का मज़बूत हिसार हैः मौलाना सय्यद अहमद अली आबिदी

हौज़ा / इमाम-ए-जुमआ मुंबई और हिंदुस्तान में आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली सिस्तानी के वकील ने ईरान के हालिया हालात पर गहरे रंज और तशवीश का इज़हार करते हुए कहा है कि इस्तिकबारी ताक़तों और उनके आलाकार मुनाफ़िक़ीन की तमाम साज़िशें रहबर-ए-मोअज़्ज़म-ए-इंक़ेलाब और मरजइयत की मज़बूत क़ियादत के सामने नाकाम हो चुकी हैं और आइंदा भी नाकाम रहेंगी।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , ईरान में हालिया दिनों पेश आने वाले अफ़सोसनाक़ वाक़िआत और कुछ बेगुनाह शहरीयों की शहादतों के बाद आलम-ए-इस्लाम की नामवर दीनी शख़्सियतों की जानिब से तशवीश और यकजहती के बयान सामने आ रहे हैं। इसी सिलसिले में मुदीर जामेअतुल इमाम अमीरुल मोमिनीन अलैहिस्सलाम (नजफ़ी हाउस), इमाम-ए-जुमआ मुंबई और हिंदुस्तान में आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली सिस्तानी के वकील हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद अहमद अली आबिदी ने एक तफ़्सीली बयान में ईरान के इस्लामी निज़ाम के ख़िलाफ़ जारी दुश्मनाना साज़िशों को बेनक़ाब करते हुए मरजइयत और रहबरीयत के किरदार को इंक़ेलाब-ए-इस्लामी की बक़ा और इस्तेहकाम का बुनियादी सुतून क़रार दिया।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद अहमद अली आबिदी ने अपने बयान में कहा, ईरान के मौजूदा हालात निहायत तकलीफ़देह और अफ़सोसनाक़ हैं। शहादतों से मुतअल्लिक़ जो ख़बरें सामने आई हैं, वो हर शख़्स को रंज़ीदा कर देने वाली हैं।इंतिहाई अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि यह मज़लूम ईरानी शहरी मुनाफ़िक़ीन के हाथों शहीद हुए।

उन्होंने कहा कि जब से इंक़िलाब-ए-इस्लामी वजूद में आया है, इस्तिकबारी ताक़तें, ख़ास तौर पर अमरीका और उसके इत्तिहादी, किसी भी सूरत में इस इस्लामी निज़ाम को कामयाब देखना नहीं चाहते। उन्होंने मुख़्तलिफ़ हीलों और बहानों से पाबंदियाँ आइद कीं और हर मुमकिन तरीक़े से ये कोशिश की कि इस निज़ाम को कमज़ोर किया जाए या इसका तख़्ता उलट दिया जाए, लेकिन हर मर्तबा उन्हें नाकामी का सामना करना पड़ा।

इमाम ए जुमआ मुंबई के मुताबिक़ इसकी बुनियादी वजह यह है कि ईरान को इब्तिदा ही से इमाम-ए-वक़्त अरवाहना फ़िदाह की सरपरस्ती हासिल रही है और आज भी ये सरपरस्ती पूरी क़ुव्वत के साथ मौजूद है। हालिया वाक़िआत अगरचे अफ़सोसनाक़ और तशवीशनाक़ हैं, मगर ये हक़ीक़त भी वाज़ेह होती जा रही है कि मुनाफ़िक़ीन और दीन-ए-इस्लाम के दुश्मन किस मुनज़्ज़म अंदाज़ में इस्लामी हुकूमत को कमज़ोर करने की साज़िशें कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वक़्त गुज़रने के साथ परदे उठेंगे और ये हक़ीक़त सब पर आशकार हो जाएगी कि इन वाक़िआत के पीछे कितनी गहरी और मुनज़्ज़म साज़िशें कारफ़रमा थीं, और ये कि ईरानी नाम रखने वाले बहुत से अनासिर दरहक़ीक़त ईरान और ईरानी क़ौम से कोई हक़ीक़ी ताल्लुक़ नहीं रखते थे।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन आबिदी ने ज़ोर देते हुए कहा कि इंक़ेलाब-ए-इस्लामी की बुनियाद इब्तिदा ही से मरजइयत और रहबरीयत पर इस्तेवार रही है। अहले बैत अलैहिमुस्सलाम के चाहने वालों के दिलों में मरजइयत की गहरी जड़ें हैं, और हर शीया दिल की गहराइयों से इससे वाबस्ता है और इसका एहतराम करता है, क्योंकि मरजइयत को अहले बैत अलैहिमुस्सलाम की नियाबत और नुमाइंदगी समझा जाता है। इसी लिए इस मुक़द्दस मक़ाम पर होने वाला हर हमला नाक़ाबिले क़बूल है।

उन्होंने मज़ीद कहा कि आज भी ईरान जिन ख़तरनाक हालात से महफ़ूज़ है, उसकी बुनियादी वजह रहबर-ए-इंक़ेलाब की बसीरत-अफ़रोज़ क़ियादत और हकीमाना रहनुमाई है। यही रहबरीयत है जिसने ईरान को साज़िशों के दलदल से निकाला और इस्तिकबारी ताक़तों को मोअस्सिर और मुँहतोड़ जवाब दिया।

उन्होंने दुश्मनों को मुख़ातिब करते हुए कहा कि वो इस मज़बूत सुतून को कमज़ोर करने के ख़्वाब देख रहे हैं, मगर इंशा अल्लाह वो कभी कामयाब नहीं होंगे।

आख़िर में मौलाना सैयद अहमद अली आबिदी ने दुआ की ख़ुदावंद-ए-मुतआल रहबर-ए-इंक़ेलाब-ए-इस्लामी की हिफ़ाज़त फ़रमाए, उन्हें तूल-ए-उम्र और आफ़ियत अता करे, इस्लाम और उम्मत-ए-मुस्लिमा को उनके वजूद से मुस्तफ़ीद रखे, दुश्मनान-ए-इस्लाम को नेस्त-ओ-नाबूद करे और इस मुक़द्दस इस्लामी निज़ाम को क़ियामत तक बाक़ी और क़ायम रखे।

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