हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हौज़ात-ए-इल्मिया बाक़िरुल उलूम व मदरसा ज़हरा, अलीपुर कर्नाटक के मुदीर मौलाना मीर अतहर अली जाफ़री ने रहबर-ए-इंक़िलाब-ए-इस्लामी की पुरज़ोर हिमायत का इज़हार करते हुए कहा कि आप उम्मत-ए-इस्लामिया की इज़्ज़त और हौज़ात-ए-इल्मिया की क़ुव्वत हैं और आप पर किसी भी क़िस्म का हमला पूरी मिल्लत के ख़िलाफ़ तसव्वुर किया जाएगा।
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
रहबर-ए-मुअज़्ज़म-ए-इंक़िलाब एइस्लामी हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई अस्र-ए-हाज़िर की अज़ीम और मुमताज़ शख़्सियात में शुमार होते हैं और इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह के रास्ते के हक़ीक़ी वारिस हैं। आपकी हिकमत-आमेज़ क़ियादत ने इस्लामी निज़ाम को दुश्मनों की साज़िशों से महफ़ूज़ रखा है और उम्मत-ए-इस्लामिया की इज़्ज़त व ख़ुदमुख़्तारी की ज़मानत फ़राहम की है।
अद्ल, रूहानियत और दीनि जम्हूरियत पर आपका मुसलसल ज़ोर आपकी गहरी इलाही और सियासी बसीरत का रौशन सुबूत है। आप हमेशा दुनिया भर के मज़लूमों के हामी रहे हैं, ख़ुसूसन फ़िलिस्तीन के मज़लूम अवाम के मज़बूत और साबित-क़दम हामी हैं। आपकी सक़ाफ़ती और इल्मी बसीरत ने मुआशरे को तरक़्क़ी, ख़ुद-एतिमादी और ख़ुद-कफ़ालत की राह पर गामज़न किया है।
सादा तर्ज़-ए-ज़िंदगी, तक़वा और इख़लास इस दाना और फ़रज़ाना रहनुमा की नुमायाँ अख़लाक़ी ख़ुसूसियात में शामिल हैं।
अल्लाह तआला का शुक्र है कि मुझे आपकी ज़ियारत का शरफ़ हासिल हुआ। यह मुलाक़ात मेरे लिए निहायत गहरा, रूहानी और नाक़ाबिल-ए-फ़रामोश तजुर्बा थी। आपकी पिदराना और मेहरबान निगाह ने ऐसा असर डाला कि बे-इख़्तियार आँखें अश्कबार हो गईं।
आपके मोहब्बत भरे अल्फ़ाज़ कि “तमाम तलबा हमारे बेटे हैं” महज़ रस्मी नहीं थे, बल्कि दिल की गहराइयों से, पूरी सच्चाई और इख़लास के साथ अदा किए गए, जो सीधे दिल पर असर कर गए। आपके कलाम में ऐसी ज़िंदा हक़ीक़त थी जिसने दिलों को बदल दिया और आँसू बे-साख़्ता जारी हो गए।
उसी लम्हे दिल की गहराइयों से दुआ निकली और मुझे कामिल यक़ीन हो गया कि आप हमेशा एक शफ़ीक़ बाप की तरह तलबा के सरपरस्त और मुहाफ़िज़ रहेंगे।
मैं बारगाह-ए-इलाही में दुआगो हूँ कि अल्लाह तआला इस हकीम रहबर और मेहरबान बाप का साया उम्मत-ए-इस्लामिया और हौज़ात ए इल्मिया पर हमेशा क़ायम रखे, और इस बसीरत-अफ़रोज़ और मुख़्लिस मरजा का बा बरकत साया ज़ुहूर-ए-हज़रत वली-ए-अस्र (अ.) तक अहल-ए-ईमान और दीनि उलूम के तलबा पर सलामत रखे।
अल्लाह तआला उम्मत-ए-इस्लामिया को उनके इल्मी, तरबियती फ़ुयूज़ व बरकात और हिकमत-आमेज़ रहनुमाई से हमेशा मुस्तफ़ीद फ़रमाए, और उनकी ज़ात-ए-गरामी को दीन की इज़्ज़त, हौज़ात की मज़बूती और मुसलमानों के इत्तेहाद का ज़रिया बनाए।
मीर अतहर अली जाफ़री
मुदीर, हौज़ात-ए-इल्मिया अलीपुर
आपकी टिप्पणी