हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हिंदुस्तान के बुर्जस्ता आलिम-ए-दीन सैयद मंज़ूर आलम जाफ़री सरसवी ने कहा कि इबादत में मशग़ूल बे-गुनाह इंसानों को निशाना बनाना ऐसा जुर्म है जिसकी कोई दीनि, अख़लाक़ी या इंसानी तौजीह मुमकिन नहीं।
उन्होंने मज़ीद कहा कि हम इस बुज़दिलाना कारवाई की सख़्त अल्फ़ाज़ में मज़म्मत करते हैं और वाज़ेह करते हैं कि दहशतगर्दी का कोई मज़हब नहीं होता। इबादतगाहों को निशाना बनाना दरहक़ीक़त इंसानियत, अम्न-ए-आलम और इस्लामी अक़दार के ख़िलाफ़ ऐलान-ए-जंग है।
उन्होंने कहा कि इस अलमनाक वाक़िये में शहीद होने वाले मोमिनीन के लिए हम बारगाह-ए-ख़ुदावंदी में दुआगो हैं कि अल्लाह तआला उन्हें शोहदा-ए-राह-ए-हक़ में शुमार फ़रमाए, उन्हें अहले-बैत-ए-अतहार अलेहिमुस्सलाम के जवार में आला मक़ाम अता फ़रमाए और ज़ख़्मियों को जल्द-अज़-जल्द मुकम्मल शिफ़ा नसीब हो।
उन्होंने कहा कि हम शोहदा के पसमांदगान से दिली हमदर्दी और ताज़ियत का इज़हार करते हैं और दुआ करते हैं कि परवरदिगार-ए-आलम उन्हें सब्र-ए-जमील, हौसला और इस्तिक़ामत अता फ़रमाए।
आख़िर में उन्होंने कहा कि हम हुकूमत-ए-पाकिस्तान और आलमी इंसानी हुक़ूक़ के इदारों से मुतालबा करते हैं कि इस दिलख़राश वाक़िये में मुलव्विस दहशतगर्द अनासिर को क़ानून के कटघरे में लाया जाए, इबादतगाहों और मज़हबी इज्तिमाआत के तहफ़्फ़ुज़ को यक़ीनी बनाया जाए और फ़िर्क़ावाराना दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ संजीदा और मोअस्सिर इक़दामात किए जाएँ।
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