हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , क़ुम के धार्मिक शिक्षा केंद्र के प्रमुख हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हमीद मल्की ने कहा है कि इस्लामी क्रांति ने ईरान को तागूत के दौर की सांस्कृतिक दबाव और घुटन से मुक्त करके इज़्ज़त, आध्यात्मिकता और असली आज़ादी के रास्ते पर ला खड़ा किया।
उन्होंने क़ुम के इमाम मूसा काज़िम धार्मिक स्कूल में हुए एक समारोह को संबोधित किया, जो इस्लामी क्रांति की सालगिरह और दस फ़ज्र दिवसों के मौके पर आयोजित किया गया था।
उन्होंने दस फ़ज्र दिवसों को समकालीन इतिहास का सबसे अहम मोड़ बताते हुए कहा कि ये वो बरकत वाले दिन हैं जिनकी शुरुआत 12 बहमन को इमाम ख़ुमैनी की वतन वापसी से हुई और दस दिनों के संघर्ष के बाद इस्लामी क्रांति की कामयाबी पर ख़त्म हुई।
हुज्जतुल इस्लाम मल्की ने तागूत के दौर की सामाजिक और सांस्कृतिक स्थिति को याद करते हुए कहा कि उस ज़माने में शहरों में शराबखानों की तादाद मस्जिदों से ज़्यादा थी, जबकि धार्मिक किताबें रखना भी ख़तरे से ख़ाली नहीं था। छोटी सी आवाज़ पर भी सख्त कार्रवाई की जाती थी और आम लोग डर और आतंक में जीने पर मजबूर थे।
उन्होंने कहा कि क्रांति के बाद देश का सांस्कृतिक माहौल पूरी तरह बदल गया और आज रेडियो, टीवी और दूसरे मीडिया क़ुरआन और अहलेबैत (अ.स.) की शिक्षाओं से सजे हुए हैं, जो एक बड़ी नेमत है, ख़ास तौर पर नई पीढ़ी को इस बदलाव को समझना चाहिए।
उन्होंने क्रांति की कामयाबी में जुझारू विद्वानों की भूमिका की तारीफ़ करते हुए शहीद आयतुल्लाह मदनी का ख़ास ज़िक्र किया और कहा कि उनकी निष्ठा, बहादुरी और जनता से लगाव क्रांति की प्रेरक शक्ति थी।
हुज्जतुल इस्लाम मल्की ने मौजूदा दौर में सर्वोच्च नेता की अगुआई को सच्चाई का सिलसिला बताते हुए कहा कि आज भी इस्लामी गणराज्य ईरान ज़ुल्म और अहंकार का मुकाबला करने के लिए डटकर खड़ा है और बुद्धिमान नेतृत्व की छाया में आगे बढ़ रहा है।
आख़िर में उन्होंने धार्मिक शिक्षा केंद्र में सेवा को एक पवित्र ज़िम्मेदारी बताते हुए कहा कि यह केंद्र इमाम ज़माना (अ.स.) से जुड़ा हुआ है और यहाँ सेवा करना एक बड़ी सफलता है, जिसके लिए निष्ठा, ईमानदारी और ज़िम्मेदारी की भावना ज़रूरी है।
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