शुक्रवार 27 फ़रवरी 2026 - 20:18
प्रधानमंत्री मोदी ने इज़राइल में फ़िलिस्तीनियों के नरसंहार का ज़िक्र नहीं किया, यह दुखद है। मौलाना कल्बे जवाद नक़वी

हौज़ा / मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इज़राइल यात्रा की आलोचना करते हुए कहा कि हर देश की नीति का एक आधार होता है और हमारी विदेश नीति का आधार फ़िलिस्तीन का समर्थन था, लेकिन अफसोस कि आज़ाद भारत के इतिहास में नरेंद्र मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो इज़राइल के दौरे पर गए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , लखनऊ, 26 फरवरी: मजलिस उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इज़राइल यात्रा की आलोचना करते हुए कहा कि हर देश की नीति का एक आधार होता है और हमारी विदेश नीति का आधार फ़िलिस्तीन का समर्थन था, लेकिन अफसोस कि आज़ाद भारत के इतिहास में नरेंद्र मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो इज़राइल के दौरे पर गए।

मौलाना ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि फ़िलिस्तीन अरबों का है, इज़राइल का नहीं। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने कहा था कि जिस तरह फ्रांस फ्रांसीसियों का, इंग्लैंड अंग्रेजों का और भारत भारतीयों का है, उसी तरह फ़िलिस्तीन अरबों का है।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कहा था कि इज़राइल ने फ़िलिस्तीन की ज़मीन पर नाजायज़ कब्ज़ा किया हुआ है। इसलिए प्रधानमंत्री अरबों की ज़मीन पर गए थे, इज़राइल की सरज़मीन पर नहीं। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री को यह कहना चाहिए था कि इज़राइल को फ़िलिस्तीनियों की सरज़मीन छोड़ देनी चाहिए, जो वे नहीं कह सके।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को इज़राइल द्वारा दिए गए सर्वोच्च सम्मान पर कहा कि अफसोस, यह सम्मान एक ज़ालिम और कातिल की ओर से दिया गया।

मौलाना ने प्रधानमंत्री के इज़राइली संसद में दिए गए भाषण पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने इज़राइल में भाषण देते हुए एक बहुत अच्छा जुमला कहा कि 'बेगुनाह नागरिकों का कत्ल किसी भी बहाने से जायज़ नहीं है'। लेकिन अफसोस कि उन्होंने हमास का उदाहरण दिया और गाज़ा में जारी इज़राइली जुल्मों को नज़रअंदाज कर दिया।

मौलाना ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को उदाहरण के तौर पर गाज़ा में इज़राइली बर्बरता का ज़िक्र करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यह बात किसी पर छिपी नहीं है कि इज़राइल ने गाज़ा में बच्चों, औरतों और जवानों का कत्लेआम किया है। छोटे-छोटे बच्चों के सीनों और सिरों में गोलियाँ मारी गई हैं, इसके सबूत दुनिया के सामने मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि इज़राइल आज तक हमास के जुल्म के सबूत दुनिया के सामने पेश नहीं कर सका, सिर्फ दावे किए हैं, लेकिन इज़राइल के जुल्म के सबूत तो दुनिया के सामने मौजूद हैं। जिस तरह प्रधानमंत्री ने हमास के जुल्म की मजम्मत की, उसी तरह इज़राइली जुल्म की भी मजम्मत करनी चाहिए थी, जो उन्होंने नहीं की।

मौलाना ने कहा कि चूंकि यह हमारे मुल्क के वकार का मामला है, इसलिए हमें प्रधानमंत्री और अपनी हुकूमत से शिकायत का हक हासिल है, इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी को गाज़ा में सायोनी हुकूमत के ज़रिए की जा रही नरसंहार की मजम्मत भी करनी चाहिए थी, मगर उन्होंने इज़राइल में फ़िलिस्तीनियों पर हो रहे जुल्म पर कोई बात नहीं की।

मौलाना ने कहा कि अमेरिका ने ईरान से तेल की खरीद पर पाबंदियाँ लगाई हैं, मगर इसकी कोई पाबंदी नहीं है, इसलिए भारत को अमेरिकी पाबंदियों को तस्लीम नहीं करना चाहिए। मौलाना ने कहा कि भारत ने ईरान के जिन तेल टैंकरों पर कब्जा किया है, वह अमेरिकी खुशनुदी के लिए था।

मौलाना ने कहा कि जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के अतिरिक्त टैरिफ के फैसले को रद्द कर दिया, तो हमारे मुल्क को भी इसे कबूल नहीं करना चाहिए। मौलाना ने कहा कि हर जमाने में एक मूसा होता है जो वक्त के फिरऔन को शिकस्त देता है। हमें यकीन है कि अमेरिका को शिकस्त होकर रहेगी।

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