हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के जाने-माने धार्मिक विद्वान मौलाना अख्तर अब्बास जौन ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाल के इज़राइल दौरे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे भारत के इतिहास का अफसोसनाक दिन बताया है।
अपने बयान में मौलाना अख्तर अब्बास जौन ने कहा कि भारत की विदेश नीति की एक ऐतिहासिक बुनियाद फ़िलिस्तीन के लिए समर्थन रही है, लेकिन मौजूदा दौर में इस परंपरा से भटकाव देखा जा रहा है। उनके मुताबिक, ऐसे समय में जब दुनिया भर में इज़राइल की पॉलिसी की कड़ी आलोचना हो रही है और कई देश खुलकर उसका सपोर्ट करने से बच रहे हैं, ऐसे में भारत के प्रधानमंत्री का इज़राइली पार्लियामेंट में इज़राइल का ज़ोरदार सपोर्ट चिंता की बात है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में इज़राइल के साथ भारत के खड़े होने की बात कही, लेकिन उनके मुताबिक, यह रुख पूरे भारत को रिप्रेजेंट नहीं करता। मौलाना ने दावा किया कि देश के ज़्यादातर लोग, चाहे वे किसी भी धर्म के हों, फ़िलिस्तीनी लोगों के साथ हमदर्दी रखते हैं।
मौलाना अख्तर अब्बास जौन ने इज़राइल-फ़िलिस्तीन झगड़े में हुई मौतों का ज़िक्र करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में आम लोग, खासकर औरतें और बच्चे, प्रभावित हुए हैं। उन्होंने अफ़सोस जताया कि कुछ घटनाओं को ग्लोबल लेवल पर हाईलाइट किया जाता है, जबकि दूसरे इंसानी नुकसानों पर पूरा ध्यान नहीं दिया जाता।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार की पॉलिसी देश की रेप्युटेशन पर असर डालती हैं, तो इसके दूरगामी नतीजे हो सकते हैं। उनके मुताबिक, भारत एक मल्टी-रिलीजियस और मल्टीकल्चरल देश है, जहाँ बड़ी संख्या में लोग शांति, न्याय और ह्यूमन राइट्स को सपोर्ट करते हैं। अपने बयान में मौलाना ने ग्लोबल पॉलिटिक्स, आतंकवाद और पहले के अलग-अलग ग्रुप्स के रोल की भी आलोचना की और कहा कि किसी भी धर्म को कट्टरपंथ के ज़रिए बदनाम करने की कोशिशें आखिर में नाकाम हो जाती हैं। उनके मुताबिक, सच्ची धार्मिक शिक्षाएं शांति, न्याय और इंसानियत का संदेश देती हैं।
यूनाइटेड नेशंस के बयानों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा तनाव का एक ऐतिहासिक बैकग्राउंड है और इसे एकतरफ़ा तरीके से नहीं देखा जा सकता। उनके मुताबिक, समस्या का पक्का हल सिर्फ़ सही बातचीत से ही मुमकिन है।
आखिर में, मौलाना अख्तर अब्बास जौन ने उम्मीद जताई कि भारत अपनी ऐतिहासिक परंपराओं, इंटरनेशनल बैलेंस और इंसानियत के उसूलों को ध्यान में रखते हुए अपनी पॉलिसीज़ का रिव्यू करेगा, क्योंकि उनके मुताबिक, नफ़रत और टकराव का माहौल ज़्यादा दिन नहीं चलता, जबकि प्यार और न्याय एक पक्का आधार देते हैं।
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