हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत नहजुल बलाग़ा किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
قال أمیر المؤمنین علیه السلام:
وَمَكَانُ الْقَيِّمِ بِالاَمْرِ مَكَانُ النِّظَامِ مِنَ الْخَرَزِ يَجْمَعُهُ وَيَضُمُّهُ: فَإِنِ انْقَطَعَ النِّظَامُ تَفَرَّقَ وَذَهَبَ، ثُمَّ لَمْ يَجْتَمِعُ بِحَذَافِيرِهِ أَبَداً
अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली (अ) ने फ़रमायाः
सरकार मे शासक की हैसीयत वही होती है जो मोहरो मे उस डोर की जो उन्हे समेट कर रखता है। जब डोर टूट जाए तो सब मोहरे बिखर जाऐंगे और फ़िर भी सिमट नही सकेंगे।
नहजूल बलागा, खुत्बा 46
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