हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,मौजूदा हालात में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची का यह बयान सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश है। उन्होंने साफ कहा कि, होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद नहीं है, बल्कि केवल उन देशों और उनके समर्थकों के लिए प्रतिबंधित है जो ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई कर रहे हैं।
ईरान का यह रुख दिखाता है कि वह पूरी दुनिया के व्यापार को रोकना नहीं चाहता, बल्कि केवल अपने खिलाफ हो रही सैन्य और राजनीतिक आक्रामकता का जवाब दे रहा है।
दरअसल, हालिया तनाव की जड़ अमेरिका और इज़रायल की सैन्य कार्रवाइयाँ हैं, जिनके कारण पूरे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हुई है। खुद ईरानी पक्ष पहले भी कह चुका है कि, क्षेत्र में जहाज़रानी की सुरक्षा को ख़तरा बाहरी आक्रामक कदमों की वजह से पैदा हुआ है, न कि ईरान की नीति से।
ईरान ने यह भी साबित किया है कि, वह जिम्मेदार तरीके से व्यवहार कर रहा है। उदाहरण के तौर पर, भारत जैसे देशों के जहाज़ों को सुरक्षित मार्ग दिया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को पूरी तरह बाधित नहीं करना चाहता।
यह क़दम दर्शाता है कि ईरान “चयनात्मक प्रतिबंध” की नीति अपना रहा है यानी दुश्मनों पर दबाव, लेकिन मित्र देशों के लिए सहूलियत।
वास्तव में होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के लिए बेहद अहम है, क्योंकि यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में ईरान के पास यह एक मजबूत रणनीतिक साधन है, और वह इसे अपने बचाव के लिए इस्तेमाल कर रहा है, न कि बिना वजह टकराव बढ़ाने के लिए।
इस पूरे घटनाक्रम से यह भी साफ होता है कि ईरान सीधे टकराव नहीं चाहता, बल्कि “आक्रामकता के जवाब में जवाब” की नीति पर चल रहा है। उसका संदेश है अगर उस पर हमला होगा, तो वह भी अपने हितों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाएगा।
ईरान का यह रुख एकतरफा युद्ध नहीं, बल्कि आत्मरक्षा और रणनीतिक संतुलन की नीति को दर्शाता है। वह दुनिया के लिए रास्ता खुला रखता है, लेकिन अपने खिलाफ खड़े देशों को स्पष्ट चेतावनी भी देता है।
20:25 - 2026/03/24
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