हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , लाहौर / वफ़ाकुल मदारिस अल-शिया पाकिस्तान के अध्यक्ष आयतुल्लाह हाफिज़ सैयद रियाज़ हुसैन नजफी ने कहा है कि दुनिया का आज सबसे बड़ा मसला ईरान-अमेरिका जंग है, जिसमें एक तरफ मुसलमान हैं और दूसरी तरफ यहूदी और ईसाई हैं। ईसाई अच्छे लोग रहे हैं, मगर अमेरिका की वजह से आजकल ये यहूदियों के पिठ्ठू बने हुए हैं, जबकि यहूदी फिरौन बन चुके हैं।
दूसरी तरफ यहूदियों और ईसाइयों के मुकाबले में तौहीद, रिसालत और इमामत के मानने वाले हैं। खुशी की बात यह है कि पूरी दुनिया निज़ाम-ए-ग़दीर के मानने वालों का समर्थन कर रही है। वतन-ए-अज़ीज़ पाकिस्तान के 90 फीसदी लोग ईरान का समर्थन कर रहे हैं।
उन्होंने विद्वानों से अनुरोध किया कि अपना सारा ध्यान जंग पर दें। अमेरिका के मुकाबले ईरान की जंग में कामयाबी इस्लाम और अहल-ए-इस्लाम की कामयाबी है। उन्होंने कहा कि रहबर-ए-मुअज़्ज़म शहीद ने इमाम हुसैन अ.स. की तरह अपने आप को कटवा दिया लेकिन सिर नहीं झुकाया, इस तरह उन्होंने मकतब-ए-कर्बला को जिंदा किया।
जामे अली मस्जिद हौज़ा ए इल्मिया जामेअतुल मुंतज़र मॉडल टाउन में जुमे का खुतबा देते हुए उन्होंने कहा कि इस्लामी इंकलाब से पहले ईरान के शाह ने इमाम खुमैनी से कहा था आपको क्या चाहिए? मेरे पास सब कुछ है, आपके पास क्या है?" तो इमाम खुमैनी ने फरमाया, "मेरी फौज माओं की गोद में है।और आज वही फौज ईरान की कमान कर रही है।
उनका कहना था कि रहबर-ए-मुअज़्ज़म शहीद आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई बहुत बड़ी शख्सियत के मालिक थे, वह मुज्तहिद और वली-ए-फकीह थे, ऐसी शख्सियत का चले जाना उम्मत-ए-मुस्लिमा का बहुत बड़ा नुकसान है, लेकिन क्या कहें ईरानी कौम और इस्लामी निज़ाम के बारे में कि इतने बड़े दुर्घटना को बर्दाश्त किया, और फिर भी निज़ाम-ए-ममलकत पूरी आब-ओ-ताब से जारी है। उन्होंने कहा कि ईरान की जंग में कामयाबी इस्लाम की कामयाबी है।
अंत में कहा कि अमेरिका के मुकाबले ईरान की जंग में कामयाबी इस्लाम और अहले इस्लाम की कामयाबी है। उन्होंने कहा कि रहबर-ए-मुअज़्ज़म शहीद ने इमाम हुसैन (अ.स.) की तरह अपने आप को कटवा दिया लेकिन सिर नहीं झुकाया, इस तरह उन्होंने मकतब-ए-कर्बला को जिंदा किया।
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