मंगलवार 12 मई 2026 - 06:11
इस्लामी गणतंत्र ईरान इतना मज़बूत है कि सबसे कठिन परिस्थितियों में भी अपना रास्ता जारी रख सकता है

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन अब्बासी ने जंग-ए-रमज़ान के शहीदों, ख़ुसूसन शहीद रहबरे इंक़िलाब को खिराज-ए-तहसीन पेश करते हुए कहा: यह दर्दनाक घटना आशूरा की तरह हक़तलबी और ज़ुल्म के ख़िलाफ़ जद्दोजहद की एक पाएदार निशानी बन गई है और इस्लामी निज़ाम ने अचानक प्रबंधकीय रिक्तता के बावजूद अपनी साख्ती मज़बूती को साबित कर दिया।

 हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जामेअतुल मुस्तफ़ा अल-आलमिय्या के प्रमुख हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन अली अब्बासी ने जामेअतुल मुस्तफ़ा के तालीमी ज़िम्मेदारान के इज्तिमा में जंग-ए-रमज़ान के शहीदों, विशेषकर इस्लामी क्रांति के शहीद नेता की याद को खिराज-ए-तहसीन पेश करते हुए कहा: जिस तरह आइम्मा-ए-मासूमीन (अ) ने आशूरा को हक़तलबी के परचम और ज़ुल्म के ख़िलाफ़ जद्दोजहद की निशानी के तौर पर आलमी सतह पर पाएदार बना दिया, उसी तरह शहीद नेता का यह तलख़ वाक़ेया भी इस इंक़िलाब के लिए एक परचम और निशानी है जो कभी फ़रामोश नहीं किया जाएगा।

उन्होंने अवाम को इस्लामी निज़ाम का असली हिमायती करार दिया और कहा: शहीद रहबरे इंक़िलाब ने चार दहियों (चार दशकों) तक इस इलाही रास्ते में हमारे मुरब्बी और राहनुमा की हैसियत से काम किया। दुश्मन का ख़याल था कि उनकी शहादत से निज़ाम-ए-इस्लामी प्रबंधकीय बोहरान का शिकार हो जाएगा, लेकिन मुक़द्दस इस्लामी निज़ाम उस ख़ला को फ़ौरन भरने में कामयाब हो गया, जो उसके सियासी ढांचे की मज़बूती को ज़ाहिर करता है।
इस वाक़िये ने साबित कर दिया कि जमहूरी-ए-इस्लामी-ए-ईरान इतना मज़बूत है कि मुश्किल-तरीन हालात में भी अपना रास्ता जारी रख सकता है।

मजलिस-ए-ख़ुबरेगान-ए-रहबरी के रुक्न ने जामेअतुल मुस्तफ़ा के सभी ख़िदमतगुज़ारों की तारीफ़ करते हुए कहा: जामेअतुल मुस्तफ़ा अफ़रादी क़ुव्वत के मायार और अहद के लिहाज़ से बेहतरीन मराकिज़ में से एक है, जिसका सुबूत हमने हालिया वाक़ियात में देखा। अल-मुस्तफ़ा के अफ़राद ने ख़तरात के बावजूद क़ाबिल-ए-तारीफ़ तौर पर अपने काम की जगह पर हाज़िर हुए और इदारे के मुलाज़िमीन में ख़िदमत का जज़्बा वाज़ेह तौर पर मौजूज़न है।

उन्होंने तालीम को अल-मुस्तफ़ा का बुनियादी फ़रज़ करार दिया और कहा: तरबियती और तहक़ीक़ाती मसाइल भी तालीम के साथ मायने रखती हैं और इस बुनियादी सरगर्मी के मुआविन के तौर पर मुतअय्यिन होती हैं। हमारा अक़ीदा है कि जामेअतुल मुस्तफ़ा के किसी भी हिस्से में ख़िदमत करना, जो मुक़द्दस इस्लामी निज़ाम के सक़ाफ़ती पहलू को बैन-उल-अक़वामी सतह पर सँभाले हुए है, एक तौफ़ीक़ और क़ीमती नेअमत है।

जामेअतुल मुस्तफ़ा के प्रमुख ने कहा: जिहाद और क़ुर्बानी का जज़्बा दुश्मन के उस मंसूबे को नाकाम बनाने वाला है जिसके तहत वह अदम-ए-तहफ़्फ़ुज़ पैदा करके मुल्क को तअत्तील करना चाहता था।

उन्होंने कहा: जामेअतुल मुस्तफ़ा में हमारा फ़रज़ तालीम के अलावा सीखने वालों की ख़िदमत करना है और दूसरे इल्मी मराकिज़ के बरक्स हम तलबा के ख़ानदान का किरदार भी अदा करते हैं।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन अब्बासी ने इस नशिस्त में अल-मुस्तफ़ा के तालीमी पहलुओं — जैसे मुतअल्लिक़ा इस्कूलों, तालीमी मुतून, असातिज़ा और इल्मी अमले — के हवाले से बातें और सिफ़ारिशें भी पेश कीं।

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