हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , रोज़ ए मुबाहिला और सूरह मुबारका "हल अता" के नुज़ूल की मुनासबत से आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में खलीफ़ा गुलाम सिद्दीक़ ने मुसलमानों के बीच अहले बैत (अ.स.) के उच्च स्थान पर ज़ोर देते हुए कहा कि पैग़म्बर-ए-अकरम (स.ल.) के परिवार से मोहब्बत एक दीऩी फ़र्ज़ और उम्मत-ए-इस्लामी का साझा आधार है।
उन्होंने इस इल्मी कार्यक्रम के आयोजकों का धन्यवाद करते हुए कहा,अहले बैत (अ.स.) से मोहब्बत तमाम मुसलमानों पर वाजिब है। अल्लाह तआला ने क़ुरआन मजीद में फ़रमाया है:
قُل لَّا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْرًا إِلَّا الْمَوَدَّةَ فِي الْقُرْبَىٰ
अर्थात: ‘कह दीजिए कि मैं तुमसे अपने पैग़ाम का कोई बदला नहीं मांगता, सिवाय इसके कि तुम मेरे निकट अहले बैत से प्रेम करो।
उन्होंने कहा कि पैग़म्बर (स.ल.) के परिवार से दोस्ती और मोहब्बत इस्लामी शिक्षाओं के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से है और यह मोमिन के ईमान की निशानी है।
खलीफ़ा गुलाम सिद्दीक़ ने अपने तथा विभिन्न इस्लामी सिलसिलों के अनुयायियों की अहले बैत (अ.स.) से गहरी श्रद्धा का उल्लेख करते हुए कहा,हम हज़रत अली (अ.स.), हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.), इमाम हसन (अ.), इमाम हुसैन (अ.) और सभी बारह इमामों से मोहब्बत करते हैं और इस मोहब्बत को अपनी रूहानी पूंजी समझते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अहले बैत (अ.स.) से मोहब्बत इंसान के दिल को रौशन करती है और कठिनाइयों के सामने साहस, दृढ़ता और स्थिरता प्रदान करती है।

खलीफ़ा गुलाम सिद्दीक़ ने क्षेत्र की हालिया परिस्थितियों और ईरान से संबंधित घटनाओं का उल्लेख करते हुए ईरानी जनता के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की और कहा,हम ईरान की जनता के साथ हैं तथा उनकी बहादुरी और दृढ़ता का समर्थन करते हैं। हमारे नज़दीक अहले बैत (अ.) से मोहब्बत इंसान को दुश्मनों से न डरने और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने की शक्ति देती है।
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